गुवाहाटी: असम पुलिस ने ‘लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर महिला पुलिस उप निरीक्षक जोनमोनी राभा की एक कथित सडक़ दुर्घटना में मौत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की है। शनिवार को असम पुलिस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जीपी. सिंह ने कहा कि नगांव और लखीमपुर जिलों में सभी पुलिस अधिकारियों का तबादला किया जा रहा है जहां वह काम करती थीं और जहां उनसे जुड़े मामले दर्ज थे जिनमें उनकी मौत से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
शुरुआत में इस मामले की जांच पुलिस के अपराध जांच विभाग को सौंपी गयी थी, लेकिन लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए इस घटना की सीबीआई से जांच करवाने की सिफारिश की जा रही है। डीजीपी ङ्क्षसह ने कहा कि पुलिस मुख्यालय में सीआईडी दल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद मैंने सरकार से जोनमोनी राभा से जुड़े चार मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है।
ङ्क्षसह ने कहा कि कानून तोडऩे वालों से सख्ती से निपटने के अपने तेवर के कारण राभा (30) की मंगलवार तडक़े उस समय मौत हो गयी थी जब उनकी कार की नगांव जिले के कालियाबर उपमंडल के सरुभुगिया गावं में एक कंटेनर ट्रक ने टक्कर मार दी थी। सिंह ने कहा कि इस मामले के लिए जन भावना पर गौर करने के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया है। डीजीपी ने कहा कि असम पुलिस के एक अधिकारी की मौत होने के कारण इस मामले की जांच किसी तटस्थ एजेंसी को सौंपना भी उचित समझा गया। राभा से जुड़े चार मामलों में से तीन नगांव जिले में दर्ज है जहां वह तैनात थीं। इनमें से पांच मई को दर्ज एक मामले में वह जांच अधिकारी थीं, जबकि दो मामले उनकी मौत से संबंधित हैं।
चौथा मामला कथित आपराधिक षड्यंत्र, डकैती, लूट, गलत तरीके से बंधक बनाने और वसूली के लिए लखीमपुर में दर्ज मामले की जांच की जाएगी। इसे उनकी मौत से एक दिन पहले 15 मई को दर्ज किया गया था। सिंह ने कहा कि नागांव और लखीमपुर के पुलिस अधीक्षक समेत सभी पुलिस अधिकारियों के तबादले का फैसला मुख्यमंत्री से चर्चा करने के बाद लिया गया है। आपराधियों से सख्ती से निपटने के अपने रवैये के लिए पहचाने जाने वाली राभा नागांव में मोरीकोलॉन्ग पुलिस चौकी की प्रभारी थीं और वह वित्तीय अनियमितताओं में कथित संलिप्तता के लिए खबरों में थीं। सडक़ हादसे में मौत के बाद राभा के परिवार और दोस्तों ने किसी साजिश का आरोप लगाया है और इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच के मद्देनजर ही यह फैसला किया गया है।
डीजीपी ङ्क्षसह साफ शब्दों में कहा कि असम पुलिस की सीआईडी द्वारा पिछले दो साल में कई मामलों की निष्पक्षता के साथ जांच की गई। हमने हर घटना को गंभीरता से लेते हुए काम किया और उसे अंजाम तक पहुंचाने में सफल हुए है। हालांकि लोगों की भावना को देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है ताकि घटना से जुड़े सच्चाई को सामने लाया जा सके। पुलिस महानिदेशक सिंह ने कहा कि नकली सोने और नकली नोट की तस्करी में शामिल रैकेट एक महीने के भीतर खत्म कर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसे रैकेट पर नकेल कसने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सिंह ने कहा कि हम नकली भारतीय नोट और नकली सोने के प्रसार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। मैंने इनके खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का निर्देश पहले ही दे दिया है। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अगले 30 दिन में असम में ये कारोबार खत्म हो जाए।
सिंह ने कहा कि इस तरह के रैकेट में शामिल 71 संदिग्धों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से नकदी और नकली सोने की छड़ें जब्त की गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे रैकेट में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने के लिए इन आरोपियों के मोबाइल फोन रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार करते हुए कहा कि असम में पड़ोसी देश के सीमाई इलाकों से नकली नोट और सोने की तस्करी की जा रही है।
हालांकि असम में अच्छी क्वालिटी की नोट नहीं आती है। एक सवाल के उत्तर देते हुए डीजीपी ने कहा कि हत्या और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए किसी भी पुलिस को नहीं छोड़ा जाएगा। दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने कई पुलिस अधिकारी को अवकास लेने के बाद में भी अपराधिक मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है।