नगांव : एसआई जोनमोनी राभा के साथ घटी घटना ने असम प्रदेश की पुलिस के सामने कई प्रकार की चुनौतियों को खड़ी कर दी है।  इस पूरी घटना को लोग अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। अपने कर्तव्यपरायणता को लेकर लोगों के बीच साहसी पुलिस अफसर के रुप में चर्चा में रहीं जोनमोनी को लेकर सवाल उठना लाजिमी भी है। यह हत्या है या फिर हादसा,यह सीआईडी और सीबीआई की रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन यह वारदात कैसे घटी, यदि हत्या हुई है तो किसके सह पर इस घटना को अंजाम दिया गया। यह सवाल सबसे बड़ा है। सीआईडी विभाग गत पांच दिनों से नगांव में डेरा डाले हुए है और कई पुलिस कांस्टेबल से लेकर आला अधिकारियों से पूछताछ कर रही है, लेकिन खबर लिखने तक इस मामले को लेकर सीआईडी विभाग यह नहीं बताया कि आखिर मामले की हकीकत क्या है?

उल्लेखनीय है कि आज सीआईडी विभाग के आईजीपी देवराज उपाध्याय भी मामले की जांच करने विशेष तौर पर नगांव में हाजिर हुए। खबर है कि हैबरगांव थाने के प्रभारी तथा वर्तमान में रिजर्व क्लोज रहने वाले आभा ज्योति राभा के साथ ही अन्य पुलिस अधिकारी से भी आज आईजीपी देवराज उपाध्याय ने जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मैराथन पूछताछ की, लेकिन पुलिस मीडिया को कुछ भी बताने से मुकर रही है। समाजिक संगठन भी अपने स्तर से जून मनी राभा मामले को उठाते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। जागरुक लोग असम पुलिस प्रशासन के सामने भी यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि इस मामले में संदेह के घेरे में रहने वालीं नगांव जिला पुलिस अधीक्षक लीना दलै को रिजर्व क्लोज करने के बजाए  हैलाकांदी जिले के पुलिस अधीक्षक के रुप तबादला करने के पीछे क्या राजनीतिक चाल है,इसे आम जनता आसानी से नहीं ले पा रहे है।

मृतक जोनमोनी राभा की माता सुमित्रा राभा ने प्राथमिकी में पुलिस अधीक्षक लीना दलै और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक त्रिदीप कुबांग को भी शक के दायरे में लिया है। फिर पूछताछ करने के बजाए दोनों अधिकारियों को तबादला करने की प्रक्रिया भी अपने आप में रहस्य का विषय  है। सोशल मीडिया में प्रसारित मृतक राभा की मां सुमित्रा राभा ने नगांव जिला प्रशासन से बार-बार पूछ रही हंै कि जोनमोनी राभा की पोस्टमार्टम करने के साथ ही उसके शव का विडियोग्राफी पुलिस ने आखिर क्यों नहीं करवाया और क्या वजह थी कि पोस्टमार्टम परिवार के आदेश के बिना जल्दी करवाया। यह भी लाख टके का सवाल है।