डिजिटल डेस्क: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में अब कैबिनेट मंत्रियों के नामों को लेकर पेंच फंसा हुआ है, हालांकि सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और पार्टी के केंद्रीय नेताओं के बीच हुई बैठक में नामों को अंतिम रूप दिया गया है। इसको लेकर सीएम सिद्धारमैया आज  राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे,और 24 और मंत्री होंगे जो शनिवार को शपथ लेंगे।

वहीं इससे पहले 20 मई को, सिद्धारमैया और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और  इनके साथ कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे समेत आठ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

मंत्रियों की सूची तैयार:

हालांकि, अब तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। वहीं इसको लेकर बीजेपी लगातार कांग्रेस पर तंज कस रही है। वहीं विभिन्न समुदायों को संतुलित करते हुए मंत्रियों की सूची तैयार करना या विभागों का आवंटन करना कांग्रेस के लिए एक मुश्किल काम होगा। राज्य में राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुदाय लिंगायत ने कांग्रेस की जीत में अपने बड़े योगदान का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था।

लिंगायत समुदाय की ज्यादा हिस्सेदारी: 

लिंगायत मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि मंत्री पद का एक हिस्सा इसी समुदाय के विधायकों को मिलेगा। अगले साल होने वाले आम चुनावों के साथ, कांग्रेस पर भी तुरंत परिणाम दिखाने और चुनावों से पहले किए गए वादों को पूरा करने का दबाव है और कर्नाटक लोकसभा में 28 सांसद भेजता है।

बीजेपी सरकार की नीतियों में बदलाव:

वहीं नए मंत्री प्रियांक खड़गे ने यह स्पष्ट कर दिया कि नई कांग्रेस सरकार पिछली बीजेपी सरकार की नीतियों की समीक्षा करके उसको ठीक करेगी और  इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मुस्लिम कोटा, हिजाब प्रतिबंध और धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर सरकार बड़ा निर्णय ले सकती है। उन्होंने आगे  कहा कि अगर कोई भी बिल या सरकारी आदेश जो कर्नाटक में वैमनस्य पैदा करता है, उसकी समीक्षा की जाएगी या उसे खारिज कर दिया जाएगा।

कांग्रेस को मिला 43 प्रतिशत वोट:

कांग्रेस ने इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक में राज्य की 224 सीटों में से 135 सीटें जीतकर भारी जीत हासिल की थी,और  राज्य में शासन कर रही बीजेपी ने 66 और एचडी कुमारस्वामी की जनता दल सेक्युलर ने 19 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने भी अपना वोट शेयर 2018 में 38.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 42.9 प्रतिशत कर लिया है, वहीं जेडीएस के वोट प्रतिशत 18.3 से 13.3 प्रतिशत तक गिर गया। वहीं बीजेपी ने 2018 से अपना 36 प्रतिशत वोट शेयर बनाए रखा।