श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के जरिए दूसरी पीढ़ी के नौवहन उपग्रह एनवीएस-01 का सोमवार को सफल प्रक्षेपण किया। एनवीएस-01 देश की क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली को मजबूत करेगा और सटीक एवं तात्कालिक नौवहन सेवाएं मुहैया कराएगा। नौवहन उपग्रह से हमारी सेनाओं को दुश्मनों के ठिकानों की सटीक जानकारी मिलेगी। इनके अलावा, नेविगेशन सर्विस भी मजबूत होगी। चेन्नई से करीब 130 किलोमीटर दूर यहां स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से 51.7 मीटर लंबे तीन चरणीय जीएसएलवी रॉकेट को 27.5 घंटे की उल्टी गिनती समाप्त होने पर प्रक्षेपित किया गया। यह पूर्व निर्धारित समय पूर्वाह्न 10 बजकर 42 मिनट पर साफ आसमान में अपने लक्ष्य की ओर रवाना हुआ।
दूसरी पीढ़ी की इस नौवहन उपग्रह शृृंखला को अहम प्रक्षेपण माना जा रहा है क्योंकि इससे नाविक (जीपीएस की तरह भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली) सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित होगी और यह उपग्रह भारत एवं मुख्य भूमि के आसपास लगभग 1,500 किलोमीटर के क्षेत्र में तात्कालिक स्थिति और समय संबंधी सेवाएं प्रदान करेगा। इसरो ने बताया कि नाविक को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि संकेतों की मदद से उपयोगकर्ता की 20 मीटर के दायरे में स्थिति और 50 नैनोसेकेंड के अंतराल में समय की सटीक जानकारी मिल सकती है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने इस मिशन के उत्कृष्ट परिणाम के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने प्रक्षेपण के बाद 'मिशन नियंत्रण केंद्र' से कहा कि एनवीएस-01 को जीएसएलवी ने उसकी कक्षा में सटीकता से स्थापित किया।
इस मिशन को संभव बनाने के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई। उन्होंने अगस्त 2021 में प्रक्षेपण यान के क्रायोजेनिक चरण में पैदा हुई विसंगति का जिक्र करते हुए कहा कि आज की सफलता जीएसएलवी एफ10 की विफलता के बाद मिली है। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि क्रायोजेनिक चरण में सुधार और सीखे गए सबक से वास्तव में लाभ हुआ है । उन्होंने समस्या के समाधान का श्रेय 'विफलता विश्लेषण समिति' को दिया। सोमनाथ ने कहा कि एनवीएस-01 दूसरी पीढ़ी का उपग्रह है, जिसमें कई अतिरिक्त क्षमताएं हैं।