नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकारी व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़ाना सभी सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने क्षमता निर्माण, भेदभाव को समाप्त करने और सेवा आपूर्ति बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यहां प्रगति मैदान में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर में पहली बार राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही। मोदी ने सरकारी कार्य के सेवा उन्मुखीकरण होने के महत्व, आम लोगों की आकांक्षाओं को साकार करने में स्वामित्व और एक संगठन में प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव का इस्तेमाल करने और जन भागीदारी के महत्व पर बल दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में अपने अनुभव का जिक्र करते हुए मोदी ने रेखांकित किया कि सरकार में प्रतिभाशाली, समर्पित और प्रतिबद्ध अधिकारियों की कभी कमी नहीं रही है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सेना ने लोगों की नजरों में अपने लिए बेदाग विश्वसनीयता बनाई है, उसी तरह सभी सरकारी कर्मचारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे सरकारी व्यवस्था में लोगों के विश्वास को और बढ़ाएं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार मोदी ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों में तैनाती को सजा के रूप में देखने का पुराना तरीका बदल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण संस्थान सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक हैं क्योंकि वे दशकों से सरकार के लिए काम कर रहे कर्मचारियों की प्रतिभा को निखारते हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रशिक्षण से प्रत्येक सरकारी कर्मचारी में 'जन भागीदारीÓ की भावना का महत्व पैदा होना चाहिए। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन की सफलता, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, अमृत सरोवर और दुनिया में डिजिटल भुगतान में भारत की पर्याप्त हिस्सेदारी का श्रेय लोगों की भागीदारी को दिया।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी सिविल सेवा के क्षमता निर्माण के माध्यम से, देश में शासन प्रक्रिया और नीति कार्यान्वयन में सुधार के समर्थक रहे हैं। इसमें कहा गया है कि इस सिलसिले में राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी)-मिशन कर्मयोगी की शुरुआत की गई। इसके अनुसार, मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य सही दृष्टिकोण, कौशल और ज्ञान के साथ, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सिविल सेवा को तैयार करना है। यह सम्मेलन इसी दिशा में एक और कदम है। उन्होंने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों को दिन भर के विचार-विमर्श के लिए शुभकामनाएं दीं और सुझाव दिया कि वे कुछ ऐसी सूचनाएं दें जिससे देश में प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचे में सुधार करने में मदद मिले।
मोदी ने नियमित अंतराल पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाने का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के बाद ट्विटर पर कहा कि आज राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन में भाग लिया, जो सीखने और बेहतर सेवा देने के हमारे प्रयासों का एक हिस्सा है। क्षमता निर्माण, भेदभाव को समाप्त करने और सेवा वितरण को बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला। मोदी ने कहा कि हम नए भारत के लिए चुनौतियों को अवसरों में बदलते रहेंगे।