नई दिल्ली : चीन दुनिया की बड़ी परमाणु ताकतों में से एक है। ये देश तेजी से एटमी हथियार डेवलप कर रहा है। चीन और पाकिस्तान ने भारत के मुकाबले तेजी से अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाई है। ये दावा स्वीडन के थिंक टैंक एसआईपीआरआईने किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ सालों में चीन ने अपने हथियारों के जखीरे में 60 तो पाकिस्तान ने 5 परमाणु हथियार जोड़े हैं। जबकि भारत ने 4 नए परमाणु हथियार डेवलप किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ऑपरेशनल परमाणु हथियारों का जखीरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मानवता सबसे खतरनाक दौर से गुजर रही है।

दुनिया में अब 12,512 परमाणु हथियार हैं। इनमें से 9576 ऐसे हैं जो हमले के लिए तैयार है। पिछली साल के मुकाबले इस साल 86 परमाणु हथियार बढ़े हैं। पूरी दुनिया में चीन ने अपने परमाणु हथियारों का जखीरा तेजी से बढ़ाया है। शीत युद्ध के खत्म होने के बाद दुनिया में परमाणु हथियारों में तेजी से कमी आई थी। अब ये ट्रेंड बदल रहा है। फिर से परमाणु हथियारों की रेस शुरू हो चुकी है। एसआईपीआरआई ने बताया है कि दुनिया के 90त्न परमाणु हथियार रूस और अमरीका के पास हैं। वहीं, 12,512 हथियारों में से 3,844 परमाणु हथियार मिसाइलों और एयरक्राफ्ट में लगाए गए हैं। एसआईपीआरआईका कहना है कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से परमाणु हथियारों की जानकारी देने में पारदर्शिता घटी है।

2021 में एनएससी के सदस्य देशों ने परमाणु हथियारों को कम करने का वादा किया था। उनका कहना था- परमाणु जंग कभी नहीं जीती जा सकती है। ये हथियार कभी इस्तेमाल नहीं किए जाने चाहिए। जबकि इस वक्त अमरीका और रूस ने अपने 2000 परमाणु हथियारों को हाई अलर्ट पर रखा है। परमाणु हथियारों की रेस को बंद करने के लिए रूस और अमरीका ने न्यू स्टार्ट ट्रीटी समझौता किया था। जिसे यूक्रेन जंग का एक साल पूरा होने पर रूस ने रद्द कर दिया था। न्यू एसटीएआरटी ट्रीटी अमरीका और रूस के बीच इकलौता परमाणु समझौता बचा था। जिसके तहत दोनों देश एक दूसरे के साथ अपने परमाणु हथियारों के परीक्षण की जानकारी को एक्सचेंज करते थे। रूस ने आरोप लगाया था कि अमरीका रूस के परमाणु हथियारों की जानकारी का गलत इस्तेमाल कर रहा है।