न्यूयॉर्क : कोरोना वायरस आखिर कहां से आया था? यह बड़ा सवाल बना हुआ है। अब एक अमरीकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह वायरस चीन की वुहान लैब से ही लीक हुआ था और बाद में इसने पूरी दुनिया को चपेट में ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान लैब के तीन वैज्ञानिक सबसे पहले कोरोना इंफेक्शन का शिकार हुए थे। इन तीनों के नाम भी सामने आ चुके हैं। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की इस हरकत के तमाम सबूत अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के पास मौजूद हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंतजार इस बात का है कि अब अमरीकी सरकार दुनिया के सामने कब सबूत रखेगी और चीन के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। एक ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर ने भी दावा किया था  कि कोरोना वुहान लैब से ही लीक हुआ था। न्यूज वेबसाइट ‘पब्लिक’ के अलावा कुछ और न्यूज पोर्टल्स ने तीन अमरीकी पत्रकारों की कोरोना पर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट पब्लिश की है।

ये तीन जर्नलिस्ट्स हैं- माइकल शेलेनबर्गर, मैट ताइबी और एलेक्स गुटेटेंग। रिपोर्ट के मुताबिक, शक अब सच साबित हो रहा है। 2019 के आखिर में कोरोना वायरल चीन के वुहान लैब से ही लीक हुआ था। सबसे पहले इसी लैब के तीन साइंटिस्ट संक्रमित हुए थे। अमरीकी सरकार में मौजूद सूत्रों के मुताबिक जो तीन वैज्ञानिक सबसे पहले संक्रमित हुए थे, उनके नाम बेन हू, यू पिंग और यान झू थे। तीनों इस लैब के लीड रिसर्चर्स थे। जर्नलिस्ट्स की इस टीम ने अमरीकी सरकार के सूत्रों से पूछा कि आप जिन तीन वैज्ञानिकों के नाम बता रहे हैं, उनके बारे में आप कितने श्योर हैं कि यही तीन सबसे पहले कोविड-19 इंफेक्शन का शिकार हुए थे? सूत्र ने कहा कि हम 100 प्रतिशत श्योर हैं। अब यह अमरीकी संसद की जिम्मेदारी है कि वो इंटेलिजेंस एजेंसीज और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिसीज के डायरेक्टर डॉक्टर एंथनी फौसी से जवाब तलब करे। चीन ने वुहान लैब में जांच की मंजूरी नहीं दी थी।

बाद में एफबीआई की टीम को यहां जाने तो दिया गया, लेकिन उसकी पहुंच बहुत कम जगहों तक थी। रिपोर्ट तैयार करने वाले जर्नलिस्टस कहते हैं कि अब सवाल ये है कि अमेरिका कब से इन तमाम बातों को जानता है और उसने चुप्पी क्यों साध रखी है? इसी साल फरवरी में एफबीआई डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने कहा था कि हम काफी वक्त से जानते हैं कि कोरोना वायरस वुहान लैब से ही लीक हुआ था। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये खुलासा पहले नहीं किया जा सकता था। अब तक तो चीन ने तमाम सबूत ही मिटा दिए होंगे। बहरहाल, कई लोग मानते हैं कि कोरोना कैसे लीक हुआ या कहां से आया, अब इस पर बहस बेमानी है। उनके मुताबिक- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोरोना कैसे शुरू हुआ। अब कुछ अमरकिी इंस्टीट्यूशन्स भी इस मामले को दबा देना चाहते हैं। दूसरी सरकारें भी कुछ नहीं कर रहीं। न्यूयॉर्क पोस्ट की कोरोना और वुहान लैब पर रिपोर्ट को तो फेसबुक तक ने बैन कर दिया था। ट्विटर ने भी इस साजिश पर काम करने वाले जर्नलिस्ट को चुप करा दिया।