वाशिंगटन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस और यूके्रन के बीच जारी युद्ध की पृष्ठभूमि में बृहस्पतिवार को कहा कि यह युद्ध का नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति का युग है और रक्तपात और मानवीय पीड़ा को रोकने के लिए जो कुछ भी हो सकता है सभी को करना चाहिए। अमरीकी कांग्रेस (संसद) के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने आतंकवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि यह आज भी पूरी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है। ‘मोदी-मोदी’ के नारों और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मोदी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम मेधा) में काफी तरक्की हुई है, लेकिन साथ साथ ही एक अन्य एआई यानि भारत-अमरीका के रिश्तों में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे सहयोग का दायरा अंतहीन है, हमारे तालमेल की क्षमता असीमित है और हमारे संबंधों में केमिस्ट्री सरल है। करीब एक घंटे के अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि अमरीका का लोकतंत्र सबसे पुराना है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लिहाजा दोनों देशों की साझेदारी लोकतंत्र के भविष्य के लिए अच्छी है। मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हमारे यहां 2500 पार्टियां हैं। हमारी 22 ऑफिशियल भाषाएं हैं। हजारों बोलियां हैं।
हर 100 मील पर खाने का तरीका बदल जाता है। भारत में विविधता जिंदगी जीने का प्राकृतिक तरीका है। भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है, बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है और हम सभी को रक्तपात और मानवीय पीड़ा को रोकने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, वह करना चाहिए। वैश्विक व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सम्मान, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता दोनों देशों की साझेदारी की केंद्रीय चिंताओं में से एक बन गई है और दोनों एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के दृष्टिकोण को साझा करते हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरीका के 9/11 हमले के दो दशक से अधिक समय बाद और मुंबई में 26/11 के एक दशक से अधिक समय बाद भी आतंकवाद और कट्टरपंथ पूरी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है और इससे निपटने में कोई अगर-मगर नहीं हो सकता। हमें आतंक को प्रायोजित और निर्यात करने वाली ऐसी सभी ताकतों पर काबू पाना होगा।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने और बेहतर संसाधनों और प्रतिनिधित्व के साथ बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार का आह्वान करते हुए कहा कि यह शासन के सभी वैश्विक संस्थानों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया बदल गई है, तो हमारे संस्थानों को भी बदलना चाहिए। मोदी ने कहा कि अमरीका ने दुनिया भर के लोगों को गले लगाया है और उन्हें अमराकी सपने में समान भागीदार बनाया है। उन्होंने कहा कि यहां लाखों लोग हैं जिनकी जड़ें भारत में हैं और उनमें से कुछ यहां इस कक्ष में गर्व से बैठते हैं। उन्होंने इस क्रम में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का भी उल्लेख किया। भारतीय लोकतंत्र और उसकी विविधता का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड के बाद भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा का जश्न मना रहा है और यह न केवल लोकतंत्र का उत्सव है, बल्कि इसकी विविधता का भी उत्सव है। उन्होंने कहा कि यह न केवल हमारे प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद की, बल्कि हमारी एकता और अखंडता के साथ ही सामाजिक सशक्तिकरण की भी भावना है।
इसलिए आज दुनिया में हर कोई भारत के विकास, लोकतंत्र और विविधता को समझना चाहता है। उन्होंने कहा कि अमरीकी कांग्रेस को संबोधित करना हमेशा सम्मान की बात होती है, लेकिन उनके लिए यह असाधारण सौभाग्य की बात है कि उन्हें यह अवसर दो बार मिला। संयुक्त सत्र को संबोधित करने से पहले प्रधानमंत्री मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की और दोनों देशों के समग्र रिश्तों की समीक्षा की तथा इसे और घनिष्ठ करने के रास्तों पर चर्चा की। वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमरीका के संबंधों एवं समग्र वैश्विक सामरिक गठजोड़ में एक नया अध्याय जुड़ा है। वहीं, अमरीकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि भारत के साथ यह साझेदारी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी में से एक है जो इतिहास में किसी भी समय अधिक मजबूत, करीबी और अधिक गतिशील है। वार्ता से पहले प्रधानमंत्री मोदी का व्हाइट हाउस में भव्य स्वागत किया गया, जहां अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन ने उनकी अगवानी की।