गुवाहाटी : सोमवार को पूरी दुनिया के साथ असम में भी अंतर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस मनाया गया। जहरीली नशीली दवा समाज को पंगु बना रही है, उभरती हुई नई पीढ़ी को बर्बाद कर रही है। नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के सख्त रुख अपनाने के बाद असम पुलिस पिछले दो सालों से लगातार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। हिमंत विश्व शर्मा के कार्यकाल के दौरान असम पुलिस ने एडीपीएस अधिनियम के तहत 6,217 मामले दर्ज किए हैं और 10,358 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है।
हालांकि अंतर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस के साथ संयोजन के रूप में संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा प्रकाशित नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं के एक सर्वेक्षण में असम की भयावह तस्वीर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के ड्रग्स और अपराध शाखा के कार्यालय (यूएनओडीसी) में वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक असम की कुल आबादी का 2.21 प्रतिशत लोग जानलेवा ड्रग्स के प्रभाव में है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सर्वेक्षण के अनुसार असम में लगभग 7.5 लाख लोग नशे के आदी हैं।
असम को म्यांमार से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक पारगमन बिंदु के रूप में भी पहचाना गया है। संयुक्त राष्ट्रसंघ का सर्वेक्षण स्वाभाविक रूप से असम की भावी पीढ़ियों के लिए एक बुरा संदेश लेकर आया है।