इंफाल : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मणिपुर के चुराचांदपुर में जातीय संघर्ष से विस्थापित लोगों से बृहस्पतिवार को मुलाकात की। गांधी निर्धारित समय से कुछ घंटों की देरी से हेलिकॉप्टर से वहां पहुंचे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी के काफिले को राज्य की राजधानी से लगभग 20 किलोमीटर दूर बिष्णुपुर में पुलिस ने हिंसा की आशंका के कारण रोक दिया था, जिसके बाद वह वापस इंफाल आए और वहां से हेलिकॉप्टर के जरिए चुराचांदपुर पहुंचे। गांधी एक राहत शिविर में गए और विस्थापित लोगों से बातचीत की। हवाई अड्डे के एक सूत्र ने कहा कि राहुल गांधी ने चुराचांदपुर जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हेलिकॉप्टर से यात्रा की। पुलिस और प्रशासन के शीर्ष अधिकारी हेलीकॉप्टर में उनके साथ थे।
बिष्णुपुर में स्थानीय पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। कुछ प्रदर्शनकारी चाहते थे कि गांधी को चुराचांदपुर जाने दिया जाए, जबकि अन्य ने उनकी यात्रा का विरोध किया। एक महिला समर्थक ने कहा कि यदि (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह चुराचांदपुर जा सकते हैं, तो राहुल गांधी क्यों नहीं। वहीं मणिपुर के विष्णुपुर के पास पुलिस द्वारा राहुल गांधी के काफिले को रोके जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा और जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों तक उनकी सहानुभूतिपूर्ण पहुंच को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निरंकुश तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि सरकारी कार्रवाई पूरी तरह से अस्वीकार्य है और सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक मानदंडों को ध्वस्त करती है।
राहत शिविरों का दौरा करने के लिए चुराचांदपुर जा रहे गांधी को पुलिस अधिकारियों ने यह कहते हुए रोक दिया कि हिंसा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह एहतियाती कदम है। वहीं, घंटों बिष्णुपुर में रुके रहने के बाद राहुल गांधी इंफाल लौट आए। खडग़े ने एक ट्वीट में कहा कि मणिपुर में गांधी के काफिले को बिष्णुपुर के पास पुलिस ने रोक दिया है। वह राहत शिविरों में पीडि़त लोगों से मिलने और संघर्षग्रस्त राज्य में राहत पहुंचाने के लिए वहां जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर पर अपनी चुप्पी तोडऩे की जहमत नहीं उठाई है। उन्होंने राज्य को उसके हाल पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अब उनकी डबल इंजन वाली विनाशकारी सरकारें राहुल गांधी के सहानुभूतिपूर्ण संपर्क को रोकने के लिए निरंकुश तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक मानदंडों को ध्वस्त करती है।
मणिपुर को शांति की जरूरत है, टकराव की नहीं। उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी सरकार गांधी को राहत शिविरों का दौरा करने और इंफाल के बाहर लोगों से बातचीत करने से रोक रही है। रमेश ने पूछा कि उनकी दो दिवसीय मणिपुर यात्रा भारत जोड़ो यात्रा की भावना के अनुरूप है। प्रधानमंत्री चुप रहना या निष्क्रिय रहना चुन सकते हैं, लेकिन मणिपुरी समाज के सभी वर्गों को सुनने और उन्हें राहत देने के राहुल गांधी के प्रयासों को क्यों रोका जाए? कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र ने आरोप लगाया कि गांधी के काफिले को रोकने का आदेश मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की ओर से आया था, क्योंकि हर कोई उनका स्वागत कर रहा था। वहीं भाजपा ने राहुल गांधी के मणिपुर दौरे को लेकर उन पर निशाना साधाते हुए उनके इस व्यवहार को 'गैर जिम्मेदाराना' करार दिया और कहा कि कांग्रेस नेता की 'जिदÓ के कारण इस हिंसाग्रस्त राज्य में एक व्यक्ति की कथित तौर पर जान चली गई।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मणिपुर के प्रभारी संबित पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन ने राज्य में मौजूदा तनाव को देखते हुए राहुल गांधी को हेलीकॉप्टर से चुराचांदपुर जाने को कहा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और सड़क मार्ग से इलाके का दौरा करने चले गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता के दौरे की खबर मीडिया में आने के बाद मणिपुर छात्र संघों सहित कई नागरिक समाज संगठन पिछले दो-तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। पात्रा ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल से हेलीकॉप्टर मार्ग से जाने को कहा गया था, क्योंकि लोग सड़क किनारे प्रदर्शन करने को उतारू थे...राहुल मानते नहीं हैं, उन्हें मोहब्बत की दुकान खोलने की जल्दी है।
जिद पर वहां चले गए। जब ऐसी स्थिति होती है तो जिद की तुलना में संवेदनशीलता कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का व्यवहार बेहद गैर जिम्मेदाराना था। राहुल और जिम्मेदारी कभी साथ-साथ नहीं चलते। उन्होंने आज फिर यह साबित कर दिया है। पात्रा ने कहा कि मणिपुर में 13 जून के बाद से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उन्होंने कहा कि लेकिन बहुत दुख की बात है ... आज एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है। पूर्व कांग्रेस प्रमुख को मणिपुर के मुद्दे के प्रति 'अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील' होना चाहिए था और स्थानीय प्रशासन की सलाह पर ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मैं हाथ जोड़कर अनुरोध करना चाहता हूं... मणिपुर में स्थिति नियंत्रण में आ रही है। हमें तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए नहीं लडऩा चाहिए।