बेंगलुरू : विपक्षी एकता की कवायद के बीच विपक्षी दलों की अहम बैठक 13 और 14 जुलाई को होगी। शरद पवार ने इसके बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि विपक्ष की अगली बैठक बेंगलुरू में होगी। इस दौरान एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बताया कि बैठक में लोकसभा सीटों के बंटवारे पर मंथन किया जाएगा। इससे पहले कहा जा रहा था कि बैठक 10 या 12 जुलाई को होगी। इतना ही नहीं, बैठक के लिए हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को चुना गया था। वहीं, बीच में बैठक के शिमला की जगह जयपुर में आयोजित किए जाने की खबर भी सामने आई थी।

पवार ने कहा कि जब पटना में विपक्षी दलों की बैठक हुई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका में थे। इसके बाद स्वदेश लौटने पर उन्होंने विपक्ष पर हमला बोला, लेकिन देश का नजरिया मौजूदा भाजपा सरकार के विपरीत है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्वलंत मुद्दों से केवल ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी लागू की कोशिश शुरू की है। पवार ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले लोकसभा और राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना चाहिए। इसके साथ ही सिख, जैन और पारसी समाज की राय ली जाए। हमने सुना है कि सिख समाज की मानसिकता इसे समर्थन देने की नहीं है। इसके बाद ही एनसीपी इस पर समर्थन के बारे में विचार करेगी।

विधि आयोग के निर्देशानुसार सभी से राय-मशविरा लेने के बाद इस पर कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। इस बीच, हिमाचल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने दावा किया था कि यह महाबैठक ही 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत की नींव रखेगी। 1998 से 2003 तक देश में एनडीए की सरकार थी, तब एनडीए को सत्ता से बाहर करने के लिए शिमला में कांग्रेस का चिंतन शिविर हुआ था। इसका फायदा कांग्रेस को मिला था। यह बैठक पटना में हुई पिछली बैठक में आए दलों के नेताओं की सहमति से हो रही है। इसमें एनसीपी, राजद, जद(यू), झामुमो, शिवसेना(यूटीबी), डीएमके, वामदल, समाजवादी पार्टी, एनसी, पीडीपी, तृणमूल समेत अन्य की सहमति है।

माना जा रहा है कि इस बैठक में विपक्षी एकता के भविष्य का फॉर्मूला एक आकार ले लेगा। इससे पहले 23 जून को बैठक में विपक्षी दलों ने एक होकर भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को चुनौती देने पर अंतिम सहमति बना ली गई थी। अब 14 जुलाई को बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा के बाद गठबंधन के नाम और इसके राष्ट्रीय कन्वेनर के नाम पर सहमति बन सकती है। हालांकि, इससे पहले ही यह चर्चा तेज हो गई है। पटना बैठक में ही गठबंधन के एक महत्वपूर्ण सहयोगी ने गठबधन के नाम और उसके सहयोगी को लेकर एक संकेत दे दिया था।