डिजीटल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत किए जाने के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है और कांग्रेस समेत विपक्ष के कई राजनीतिक दलों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इसे देश के ऊपर थोपा नहीं जा सकता है। इस मुद्दे पर अब बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन में दरार दिखाने लगी है। खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों में एनडीए के कुछ सहयोगी दलों ने इसे जनजातियों के लिए ठीक नहीं बताया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की माने तो, पूर्वोत्तर में एनडीए के सहयोगी दलों का कहना है कि यूसीसी की वजह से लोगों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों पर अंकुश लगेगा। पूर्वोत्तर के राज्यों में 200 से अधिक जनजातियां निवास करती हैं और इन जनजातियों का अपना कल्चर है और उसी के हिसाब जीवन यापन करती हैं तथा भारत की 12 फीसदी से अधिक जनजातीय आबादी पूर्वोत्तर में रहती है।
पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के सीएम और बीजेपी की सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी के मुखिया कॉनराड संगमा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करते हुए इसे भारत के वास्तविक विचार के खिलाफ बताया है और उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और यही हमारी ताकत है। एक राजनीतिक दल के रूप में हमें लगता है कि पूरे पूर्वोत्तर में अनूठी संस्कृतिया हैं, हम चाहते हैं कि ये संस्कृतियां बनी रहें और इन्हें छुआ न जाए।
नागालैंड में एनडीपीपी ने भी किया विरोध:
वहीं, नागालैंड में बीजेपी की सहयोगी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ने शनिवार को ही यूसीसी को लेकर अपना विरोध जता दिया है और पार्टी ने कहा, यूसीसी को लागू करने से अल्पसंख्यक समुदाय और आदिवासियों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। पार्टी की ओर से 29 जून को लॉ कमीशन की पब्लिक नोटिस का भी जवाब दिया गया जो यूसीसी को लेकर जारी किया गया था।
इसके लिए पार्टी ने एक लंबा चौड़ा बयान जारी किया और पार्टी की ओर से जारी चिट्ठी में कहा गया कि फ्रीडम हमारे संविधान का बेसिक हिस्सा है और इसके साथ कभी छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। NDPP एक विचारधारा वाली पार्टी है, जो सभी के अधिकारों और ट्रेडिशन पर विश्वास रखती है और हम यूसीसी के लागू किए जाने के खिलाफ हैं।
पीएम मोदी ने भोपाल रैली में किया यूसीसी का जिक्र:
दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सभा को संबिधत करते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठाया तथा प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक के चक्कर में इसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने दुनियाभर के बाकी देशों का हवाला देते हुए पूछा था, क्या एक परिवार में दो नियम हो सकते हैं? प्रधानमंत्री ने आगे कहा, देश के कुछ राजनीतिक दल मुसलमान भाइयों और बहनों को भड़का रहे हैं।
शुक्रवार को मिजोरम के गृह मंत्री लालचामलियाना ने कहा कि यूसीसी को भले ही संसद की ओर से पास क्यों न कर दिया जाए, लेकिन इसे मिजोरम में तब तक लागू नहीं किया जा सकता है जबकि राज्य विधानमंडल इस संबंध में प्रस्ताव पास नहीं करती है। वहीं, असम में बीजेपी की सहयोगी एजीपी भी मंगलवार को इस मुद्दे पर अपने स्टैंड को लेकर चर्चा कर सकती है।