गुवाहाटी : केंद्र और असम सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले आठ आदिवासी विद्रोही संगठनों के कुल 1100 सदस्यों ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा को अपने हथियार सौंप दिए। प्रत्येक संगठनों के प्रतिनिधियों ने यहां एक समारोह में अपने हथियार सौंपे।  इन संगठनों की ओर से सौंपे गए 300 से अधिक इन हथियारों में एके सीरीज की राइफल, लाइट मशीनगन और अन्य हथियार शामिल हैं। समारोह स्थल पर 200 से अधिक हथियार प्रदर्शित भी किए गए। इस अवसर पर आदिवासी कल्याण एवं विकास परिषद के पदाधिकारियों ने भी शपथ ली। केंद्र और असम सरकार के साथ हुए शांति समझौते के तहत ही पिछले साल सितंबर में इस परिषद का गठन किया गया था ताकि 2016 से शिविरों में रह रहे आदिवासी संगठनों के सदस्यों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

आदिवासी संगठनों के इन समूहों ने 2016 से ही संघर्ष विराम किए हुए है। इन संगठनों में ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी (एएएनएलए), एएएनएलए (एफजी), बिरसा कमांडो फोर्स (बीसीएफ), बीसीएफ (बीटी), संथाल टाइगर फोर्स, आदिवासी कोबरा मिलिटेंट ऑफ असम (एसीएमए), एसीएमए (एफसी) और आदिवासी पीपुल्स आर्मी (एपीए) शामिल हैं। इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि सभी असंतुष्ट तत्वों को शांति प्रक्रिया में लाने के हमारे प्रयासों से लाभ हुआ है। कारण कि आठ आदिवासी उग्रवादी समूहों ने समाज की मुख्य धारा में आने के लिए अपने हथियार डाल दिए हैं। यह असम में शांति को मजबूत करने और राज्य को आगे बढ़ाने की दिशा में सभी को साथ लेने के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अल्फा (स्वतंत्र) से बातचीत की अपील भी की। उन्होंने कहा कि असम में जब सभी उग्रवादी समूह मैदान में आ गए हैं, तो अल्फा को भी राज्य के सभी वर्गों के लोगों के हित में बातचीत के लिए आना चाहिए।

इस मौके पर डॉ. शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की शांति और विकास में केंद्रीय गृह मंत्री की गहरी रुचि के कारण ही इस क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पुनर्वास के लिए सभी कैडरों को चार-चार लाख रुपए देने की घोषणा की। यह राशि सावधि जमा होगी और कैडर सावधि जमा राशि के आधार पर 3 लाख रुपए तक का ऋण ले सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रत्येक कैडर को स्वरोजगार की दिशा में मदद के लिए तीन साल तक 6 हजार रुपए मासिक भी देगी। उन्होंने उनसे किसी भी बाहरी उत्तेजना से प्रभावित न होने और दोबारा हथियार हाथ में लेने से परहेज करने को भी कहा। इस अवसर पर उन्होंने उन व्यक्तियों को भी अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने आदिवासियों के सशस्त्र संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवा दी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि असम शांति और विकास के मजबूत रास्ते पर है जहां सभी वर्ग के लोग विकास का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाय समुदाय और आदिवासियों के विकास के लिए सरकार ने 119 मॉडल स्कूल स्थापित किए हैं।

इसके अलावा, चाय समुदाय और आदिवासियों के लिए एमबीबीएस की सीटों के आरक्षण के अलावा, बीएससी नर्सिंग, एएनएम और जीएनएम पाठ्यक्रमों के लिए सीटों का आरक्षण होगा। चाय समुदाय और आदिवासियों के लिए सरकारी नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया जाएगा। सीएम ने यह भी कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों की संस्कृति, भाषा और साहित्य की सुरक्षा के लिए कदम उठा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 16 सदस्यीय आदिवासी कल्याण एवं विकास परिषद को शपथ लेने पर बधाई दी।

उन्होंने कहा कि चाय और आदिवासी समुदाय के लोगों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार जो कदम उठा रही है, उसे देखते हुए परिषद को बड़ी भूमिका निभानी होगी। समारोह में जल संसाधन आदि मंत्री पीयूष हजारिका, चाय जनजाति कल्याण मंत्री संजय किसान, सांसद पल्लव लोचन दास, कामाख्या प्रसाद तासा, विधायक रूपज्योति कुर्मी, कृष्ण कमल तांती, रूपेश ग्वाला, डीजीपी जीपी सिंह, प्रधान सचिव गृह एवं राजनीतिक नीरज वर्मा, प्रधान सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मुकेश चन्द्र साहू, एडीजीपी हिरेन नाथ सहित कई अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।