डिजीटल डेस्क: केंद्रीय कैबिनेट ने जन विश्वास विधेयक 2023 को मंजूरी दे दी है और इसके जरिए 42 कानूनों में संशोधन किया जाना है। यह 19 मंत्रालयों से संबंधित है तथा कृषि, पर्यावरण, मीडिया और पब्लिकेशन से संबंधित 183 प्रावधानों में संशोधन कर छोटी-मोटी गड़बड़ियों को अपराध की श्रेणी से हटाया जाना है तथा बुधवार को इसकी कैबिनेट मीटिंग में विधेयक पर चर्चा हुई।
आखिर ये विधेयक है क्या और क्या बदलाव होंगे:
1. जन विश्वास प्रावधान संशोधन विधेयक में इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट-1898, एनवायरनमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट-1986, पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट-1991 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट-2000 के प्रावधानों में बदलाव किए जाएंगे और इस विधेयक के जरिए कुछ अपराध के लिए फाइन को पेनल्टी में बदला जाना है। फाइन कार्यवाही के बाद कोर्ट लगाता है और पेनल्टी संबंधित अथॉरिटी कानून, नियमों और कॉन्ट्रेक्ट के उल्लंघनों पर लगाता है। मसलन, पेनल्टी के लिए अदालती कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती है इससे भी कोर्ट पर दबाव भी कम हो सकता है।
2.विधेयक में कुछ अपराध के लिए जेल की सजा को खत्म किए जाने का प्रावधान है और कुछ अपराध के लिए सजा के बदले सिर्फ जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जैसे कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट-2000 में प्रावधान है कि कोई शख्स कानून का उल्लंघन करते हुए अगर व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करता है तो उसे तीन साल की जेल और पांच लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा। अब विधेयक में इसे 25 लाख रुपए जुर्माने में बदलने का प्रावधान किया गया है और जेल की सजा को खत्म किया गया है।
3.इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट-1989 के सभी अपराधों को खत्म किया जाएगा, जो कि सिर्फ पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों पर लागू होंगे और इनके अलावा कई अन्य कानून में अपराध के लिए जेल की सजा को जुर्माने में बदला जाएगा।
4.कुछ कानूनों में फाइन और पेनल्टी को बढ़ाया भी गया है तथा प्रस्तावित विधेयक में प्रावधान यह भी है कि हर तीन साल की अवधि में फाइन और पेनल्टी में 10 फीसदी का इजाफा किया जाएगा।
5.केंद्र सरकार एक एडजुकेटिंग ऑफिसर को अपॉइंट कर सकती है, जो खासतौर पर किसी अपराध के लिए पेनल्टी तय करेंगे तथा ये अधिकारी अपराध में शामिल शख्स को समन भेज सकते हैं और इनसे सबूत मांग सकते हैं और संबंधित कानूनों के तहत मामले की जांच कर सकते हैं. इसके आधार पर वे संबंधित अपराधी पर पेनल्टी लगा सकते हैं। मसलन, एग्रिकल्चर प्रोड्यूस (ग्रेडिंग एंड मार्केटिंग) एक्ट-1937 और पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट – 1991 के लिए एडजुकेटिंग ऑफिसर अपॉइंट किए जा सकते हैं।