डिजीटल डेस्क: UCC को लेकर आज शिया उलेमा सम्मेलन आयोजित किया गया तथा शिया मौलाना  और बुद्धिजीवियों  ने यह फैसला लिया की UCC मामले में  जो राय ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की है और शिया समुदाय UCC का विरोध करता है  तथा बाबत शिया समुदाय की तरफ से मेमोरेंडम सरकार को आज ही भेज दिया जाएगा।

अब ऐसा नहीं है की सभी शिया मौलानाओं और बुद्धिजीवियों ने UCC का विरोध ही किया है और  कुछ ने इसको लेकर शिया समुदाय के फैसले का भी विरोध किया है। अब इन्हीं में से एक हैं उलेमा फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना कौकव मुज्तबा और उन्होंने आगे कहा कि बैठक में मौजूद किसी को भी UCC के बारे में कुछ भी पता नहीं है तथा बगैर पढ़े लोगों ने अपनी बात कही है अगर UCC भारत की जनता के लिए सही है तो हम इसका समर्थन करेंगे, अगर इससे किसी धर्म को ठेस पहुंचती है तो पीएम से आग्रह करेंगे कि इसे ठीक करें।

मौलाना कौकव का आगे कहना है कि जब किसी ने पढ़ा ही नहीं है तो उसको लागू करने न करने का सवाल कहां से आता है तथा उन्होंने आगे कहा कि CAA, NRC को लेकर भी ऐसा ही कहा गया था और यहां राजनीति हो रही है और अभी कानून बना नहीं और शोर होने लगा है।

‘एक से ज्यादा शादी नहीं कर पाएंगे’:

वहीं शिया उलेमा सम्मेलन के आयोजक मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि अभी ड्राफ्ट ही नहीं आया है और  UCC की जरूरत ही नहीं है, संविधान इतना मजबूत है उसमें किसी बदलाव की जरूरत क्या है? संविधान में आर्टिकल 25 से 30 के बीच साफ कहा गया है कि भारत मे रहने वाला हर इंसान अपने धर्म के अनुसार जीने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन ये मुसलमानों के ऊपर थोपा जा रहा है और इसी दौरान नकवी ने कहा कि शायद इस कानून के लागू होने पर हम एक से ज्यादा शादी नहीं कर पाएंगे।

क्या सरकार के पास जानेसे  निकलेगा समाधान:

नकवी बैठक से पहले ही UCC के विरोधी माने जा रहे थे और  उन्होंने बैठक से पहले कहा था कि आज इस कानून की जरूरत नहीं है और इसी लिए हमें ये बैठक करनी पड़ रही है। उनका कहना था कि कई राज्यों ने इसका विरोध किया है और इसका विरोध करने वाले सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि अन्य समुदायों से भी हैं।

वहीं उलेमा फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना कौकव का मानना है कि किसी भी मामले में अगर हम अपनी बात लेकर सरकार के पास जाएंगे तो उसका समाधान भी निकलेगा लेकिन सरकार हमारे लिए काला चश्मा लगाकर नहीं बैठी है। सरकार के पास जब हम जाएंगे तो वो हमारी बात मानेंगे किसी और की नहीं और इस दौरान उन्होंने कहा कि शिया समुदाय के उलेमा जब भी सरकार के पास जाएं तो अकेले नहीं जाएं, सबको साथ लेकर जाएं।