गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने आज रविवार को कहा कि किसी भी हिंदू को धन के प्रलोभन में आकर ईसाई या मुसलमान नहीं बनना चाहिए। समाज सेवा करने के नाम पर धर्म परिवर्तन ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री ने आज रविवार को भूमिपुत्र और जनजातीय मान्यताओं और संस्कृृति निदेशालय के तत्वावधान में गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज हॉल में आयोजित एक समारोह में उपरोक्त आशय की बाते कहीं। इस अवसर पर 18 भूमिपुत्र और जनजातीय विश्वास और सांस्कृृतिक प्रतिष्ठानों को 10-10 लाख रुपए, 73 भूमिपुत्र और जनजातीय विश्वास धार्मिक पूजा स्थलों में से प्रत्येक को 7 लाख रुपए और दुलाराई बाथौ गौथुम (अखिल बाथौ महासभा, गढ़चुक, गुवाहाटी) को 2 करोड़ रुपए प्रदान किए। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन असम के भूमिपुत्र और जनजाति समुदायों की मान्यताओं और संस्कृृति को बढ़ावा देने और संरक्षित करने की दृष्टि से एक विशेष दिन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन भूमिपुत्र लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने असम की रंगारंग संस्कृृति को समृद्ध किया है। इस प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए विभिन्न भूमिपुत्र लोगों के संस्थानों और पूजा स्थलों को वित्तीय सहायता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार असम के भूमिपुत्र और जनजातीय समुदायों की भाषाओं, कला, संस्कृृति और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और संरक्षण की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके तहत असम के 22 जिलों में 18 संस्थानों को कुल 80 करोड़ रुपए और 73 पूजा स्थलों को 7 लाख रुपए का दान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जिस धर्म में विश्वास करता है, वह पूजा कर सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान के निर्माताओं ने व्यक्तियों के धर्म, विश्वास और संस्कृृति की रक्षा के लिए एक सकारात्मक अनुच्छेद शामिल किया है। उन्होंने कहा कि प्रलोभन या किसी अन्य माध्यम से धर्मांतरण को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्राचीन काल से ही प्रकृृति से संघर्ष करते हुए हजारों वर्षों से अपनी मान्यताओं के साथ जीवन यापन कर रहा है। उन्होंने कहा कि असमिया जनजातीय समाज का निर्माण 500 वर्षों के भीतर नहीं हुआ है। यह समाज हजारों वर्षों से अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि विभिन्न आदिवासी लोग अपने-अपने रीति-रिवाजों के साथ अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे समुदाय ऊर्जा में विश्वास के कारण हजारों वर्षों से जीवित है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण कई धार्मिक मान्यताएं लुप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आज पूर्वोत्तर में कई धार्मिक मान्यताएं लुप्त हो गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों साल पुरानी परंपरा को लुप्त नहीं होने देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृृति का निर्माण धर्म से होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नृत्य और गीत परमात्मा को संतुष्ट करने के लिए बनाए गए और समय के साथ यह एक संस्कृृति बन गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर जनजातीय समाज के धर्म, संस्कृृति और मान्यताओं का सम्मान किया जाएगा तो समाज सुंदर रहेगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय लोगों के धर्म और मान्यताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए गुवाहाटी में एक धार्मिक उत्सव का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय आध्यात्मिक स्थलों को सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय भूमिपुत्र खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में मैदानी जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री यूजी ब्रह्मा, ऊर्जा मंत्री नंदिता गर्लोसा, आवास और शहरी मामलों के मंत्री अशोक सिंघल, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव और सांसद पवित्र मार्घेरिटा, कार्बी आंग्लांग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलीराम रंगहांग और कई विधायक उपस्थित थे।