नई दिल्ली : मणिपुर की स्थिति पर संसद में चर्चा कराए जाने की विपक्ष की मांग के बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि वह 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में नियमों एवं प्रक्रियाओं के तहत पूर्वोत्तर के इस राज्य की स्थिति सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा को तैयार है। संसद के बृहस्पतिवार से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र में सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संवाददाताओं से कहा कि सभी दल मणिपुर की स्थिति पर चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। मणिपुर पर सरकार चर्चा कराने को तैयार है। उन्होंने कहा कि जब भी लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति समय तय करते हैं, हम चर्चा कराने को तैयार हैं। जो भी मुद्दे होंगे, हम नियमों एवं प्रक्रियाओं के तहत चर्चा कराने को तैयार हैं। सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने मणिपुर की स्थिति के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की मांग करते हुए ओडिशा रेल हादसे, भारत-चीन सीमा स्थिति, महंगाई, संघीय ढांचे पर प्रहार जैसे मुद्दों पर चर्चा कराने एवं महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने कहा।

कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक में हमने संसद के मानसून सत्र के दौरान मणिपुर की स्थिति पर चर्चा कराने की मांग की। चौधरी ने कहा कि हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा हो। लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने कहा कि दो महीने गुजर गए लेकिन प्रधानमंत्री (नरकिंद्र मोदी) चुप हैं। मैं उनसे आग्रह करना चाहता हूं कि उन्हें संसद में बयान देना चाहिए और चर्चा करानी चाहिए। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि आज केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें 34 दलों के 44 नेताओं ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण सुझाव आए। ये सुझाव विपक्षी दलों से भी आए और सहयोगी दलों से भी मिले। जोशी ने बताया कि सत्र के दौरान सरकार के पास 31 ‘विधायी विषय’ हैं। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि मणिपुर हिंसा और महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष कोई समझौता नहीं कर सकता तथा संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिल्ली से संबंधित केंद्र के अध्यादेश के स्थान पर लाए जाने वाले विधेयक का विरोध करेगी, क्योंकि यह एक चुनी हुई सरकार के संवैधानिक अधिकारों पर अंकुश लगाने वाला है।

रमेश ने कहा कि कांग्रेस संसद चलाने के लिए रचनात्मक सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन केंद्र सरकार को ‘माई वे या हाईवे’ वाला रवैया छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र में मणिपुर के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब और गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय करने की मांग भी की जाएगी। रमेश के मुताबिक, संसद के मानसून सत्र से पहले ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस’ (इंडिया) के बनने के बाद विपक्षी दलों का उत्साह बढ़ा है और नई उमंग पैदा हुई है। कांग्रेस नेता ने संसद सत्र के लिए ‘इंडिया’ की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि 26 पार्टियों के गठबंधन की कल बेंगलुरु में हुई बैठक में काफी लंबी चर्चा हुई कि किन-किन मुद्दों पर हमें ध्यान देना चाहिए। प्राथमिकता मणिपुर है। मणिपुर में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए हैं। गृह मंत्री अमित शाह के दौरे का कोई असर नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह बिल्कुल विफल है। रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अब तक अपनी चुप्पी तोड़ी नहीं है...प्रधानमंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए और सांसदों को विश्वास में लेना चाहिए।