नई दिल्ली : मणिपुर का एक वीडियो वायरल है, जिसमें भीड़ दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमा रही है। इसे जिसने भी देखा कलेजा कांप गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो वीडियो हमारे सामने आया है, उससे हम बहुत परेशान हैं। ये घटना 4 मई 2023 की है। उस दिन क्या हुआ था जानें पीडि़ता की जुबानी। मणिपुर में मैतई और कुकी समुदायों के बीच झड़प के एक दिन बाद 4 मई को कांगपोकपी जिले के बी फीनोम गांव के पास हमला हुआ था। इस दौरान भीड़ ने कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमाया। इस दौरान एक महिला के साथ दिनदहाड़े बलात्कार किया गया। इस घटना का एक वीडियो वायरल होने के बाद हर ओर गुस्सा है। इस वीडियो में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर ले जाते हुए दिखाया गया है।
कई युवा पुरुषों को उनके साथ-साथ चलते देखा जा सकता है, जबकि अन्य पुरुष परेशान दिख रही महिलाओं को खेतों में खींच रहे हैं। एक न्यूज वेबसाइट ने पीडि़त महिलाओं में से एक महिला से बात की। 40 वर्षीय महिला ने बताया कि जब हमने सुना की मैतई भीड़ पास के गांव में घरों को जला रही है तो हमारा परिवार और अन्य लोग भाग निकले, लेकिन भीड़ ने खोज लिया। हमारे पड़ोसी और बेटे को थोड़ी दूर ले जाकर मार दिया गया। इसके बाद भीड़ ने महिलाओं पर हमला करना शुरू कर दिया और उन्होंने हमसे कपड़े उतारने के लिए कहा।
पीडि़त महिला ने बताया कि हमने इसका विरोध किया। इसके बाद उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अगर तुम कपड़े नहीं उतारोगी तो हम तुम्हें मार डालेंगे। इसके बाद खुद को बचाने के लिए मैंने कपड़े उतार दिए। इस दौरान वहां मौजूद पुरुषों ने मुझे थप्पड़ और मुक्के मारे। मुझे पता नहीं चला कि मेरी 21 साल की पड़ोसी के साथ क्या हो रहा है, क्योंकि वह कुछ दूरी पर थी। महिला ने आरोप लगाया कि मुझे सड़क के पास एक धान के खेत में खींच लिया गया और पुरुषों ने लेटने के लिए कहा। इसके बाद मैं खेत में लेट गई। तीन लोगों ने मुझे घेर रखा था।
उनमें से एक ने दूसरे से कहा- चलो इसका रेप करते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मैं भाग्यशाली थी कि मेरे साथ रेप नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने मेरे शरीर को छुआ।' महिला ने दावा किया कि पुलिस घटनास्थल पर मौजूद थी, लेकिन पुलिस ने न तो हस्तक्षेप किया और न ही उनकी मदद की। हिंसा की शिकार एक महिला ने कहा कि मणिपुर पुलिस ने घटना के दौरान उनकी कोई सहायता नहीं की। महिला ने कहा कि उसने एक कार में चार पुलिसकर्मियों को देखा था, जिन्होंने उनकी कोई सहायता नहीं की। पुलिस मूक दर्शक बनी रही।