वॉशिंगटन : भारत और अमरीका मिलकर लंबी दूरी तक वार करने वाले हथियार बनाने पर काम कर रहे हैं। इनका इस्तेमाल चीन को काउंटर करने के लिए एलएसी पर किया जाएगा। ये जानकारी अमरीका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन के टॉप अधिकारी एली रैटनर ने दी है। चीन को लेकर अमरीकी संसद में हो रही एक बैठक के दौरान इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी अफेयर्स के एसिस्टेंट सेक्रेटरी रैटनर ने अमरीका के इस फैसले को अभूतपूर्व बताया है। उन्होंने कहा कि ये फैसला दिखाता है कि बाइडेन प्रशासन इंडो-पैसिफिक में अपने दोस्तों की मदद के लिए तैयार है। रैटनर ने कहा है कि अमरीका न सिर्फ भारत, बल्कि जापान और ऑस्ट्रेलिया की भी दुश्मन पर हमला करने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है।
फस्र्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और अमरीका के बीच लंबी दूरी तक वार करने वाली तोपें और बख्तरबंद गाडिय़ां बनाने का मसौदा पीएम मोदी के अमरीका दौरे से पहले तैयार हुआ था। रैटनर ने कहा कि पीएम मोदी के अमरीका दौरे पर हमने मिलकर जेट इंजन बनाने की डील की थी। जबकि हम भारत के साथ लंबी दूरी की तोप और बख्तरबंद गाडिय़ां बनाने के प्रपोजल पर भी काम कर रहे हैं। जो चीन बॉर्डर पर भारत की जरूरतें पूरी करने का काम करेंगे। दरअसल, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अमरीका के जैक सुलिवन ने इस साल की शुरुआत में आईसीईटी (इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी) की शुरुआत की थी।
यह पहल अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर शुरू की गई है। मई 2022 में टोक्यो में अपनी बैठक के बाद दोनों देशों की सरकारों ने उद्योगों और अकादमिक संस्थानों के बीच टेक्नोलॉजी शेयर करने व रक्षा औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने की घोषणा की थी। एस जयशंकर और वांग यी ने आसियान की मीटिंग के तहत पिछले हफ्ते इंडोनेशिया में मुलाकात की थी। इस दौरान एलएसी का मुद्दा भी उठा था। एस जयशंकर ने जहां भारत-चीन बॉर्डर से जुड़े अनसुलझे विवादों का मुद्दा उठाया। वांग यी ने इस पर कहा कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ऐसे समाधान की जरूरत है जिसे दोनों देश मंजूर कर सकें। उन्होंने यह भी कहा था कि चंद मुद्दों से भारत-चीन के रिश्ते को परिभाषित नहीं किया जा सकता है।
एस जयशंकर और वांग यी ने इंडो-पैसिफिक के मुद्दे पर भी चर्चा की। 2019 में जब चीन के राष्ट्रपति भारत आए तो दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर होने की उम्मीद जगी थी। फिर गलवान झड़प ने सब बदल दिया। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीन के 38 सैनिक मारे गए थे। हालांकि, चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने 4 सैनिक मारे जाने की बात ही कबूली थी। यह टकराव करीब 3 घंटे तक चला था। वहीं, 2022 में दोनों देशों की सेनाओं में फिर टकराव हुआ। अरुणाचल के तवांग में चीनी सैनिकों ने भारतीय पोस्ट को हटाने की कोशिश की। भारत के 6 जवान घायल हुए। चीन को हमसे ज्यादा नुकसान हुआ।