गुवाहाटी : भारत निर्वाचन आयोग की शुक्रवार को पूरी हुई जनसुनवाई के दौरान असम में परिसीमन को लेकर लोगों ने अलग-अलग विचार रखे। इनमें से कुछ लोगों ने असम में परिसीमन के समय पर सवाल उठाया और कुछ लोगों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया। असम के संसदीय और विधानसभा निवार्चन क्षेत्रों के परिसीमन के मसौदे पर तीन दिन तक चली जन सुनवाई निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ कर रही थी। पीठ की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार कर रहे थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जनसुनवाई के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल और जिस प्रकार बिना किसी हंगामे के अलग-अलग विचार रखे गए इसका स्वागत किया। निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि पिछले तीन दिन की जनसुनवाई के दौरान आयोग ने धैर्यपूर्वक समाज के विभिन्न तबकों और संगठनों आदि के विचार सुने हैं और संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के अनुरुप सभी की बातों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। यहां शुक्रवार को राज्य के शेष 9 जिलों के लोगों के साथ सुनवाई हुई। 19-21 जुलाई, 2023 तक असम के परिसीमन प्रस्ताव के मसौदे पर गुवाहाटी में सार्वजनिक सुनवाई की जो शुक्रवार को राज्य के शेष 9 जिलों के अभ्यावेदन की सुनवाई के साथ उनका समापन हुआ।
परिसीमन प्रक्रिया के दौरान आयोग की ओर से परामर्शी अभ्यास के हिस्से के रूप में यह सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे और अरुण गोयल वाले आयोग ने पिछले तीन दिनों के दौरान परिसीमन प्रस्ताव के मसौदे पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों और जनता के सदस्यों से सुनवाई की। पिछले तीन दिनों के दौरान आयोग ने 31 जिलों से 1200 से अधिक अभ्यावेदन सुने और 20 से अधिक राजनीतिक दलों के साथ बैठकें कीं। पिछले तीन दिनों में कुल मिलाकर 6000 से अधिक व्यक्तियों ने सार्वजनिक सुनवाई में भाग लिया। मैराथन बैठकों में, 20 जुलाई को, सुनवाई कुल मिलाकर 20 घंटे से अधिक चली, क्योंकि तीन आयुक्तों ने 3 स्थानों पर समानांतर सुनवाई की। 19 जुलाई और 21 जुलाई में भी ऐसा ही हुआ। बैठकों से पहले प्राप्त 1000 से अधिक अभ्यावेदनों के सार की स्क्रीनिंग से इस महत्वपूर्ण अभ्यास में महत्वपूर्ण तथ्यों और हितधारकों की भागीदारी की पहचान की मौके पर ही पुष्टि की सुविधा मिली।
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि तथा राज्य दलों ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, असम गण परिषद, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के प्रतिनिधि ने आयोग के समक्ष अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव साझा किए। इसके अलावा संयुक्त विपक्षी मंच असम (असम प्रदेश कांग्रेस, असम जातीय परिषद, सीपीएम, रायजोर दल, सीपीआई, जातीय दल असम, एनसीपी, राजद, जनता दल (यू), टीएमसी, सीपीआई (एमएल) और अन्य) और कई पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) ने भी सुनवाई में भाग लिया। सार्वजनिक सुनवाई के दौरान पाए गए कि एससी विधानसभा सीटों को 8 से बढ़ाकर 9 और एसटी विधानसभा सीटों को 16-19 करने का विभिन्न संगठनों ने व्यापक स्वागत किया। कई संगठनों ने भी 2001 की जनगणना पर आधारित मसौदा प्रस्ताव का स्वागत किया और वे परिसीमन प्रस्ताव के मसौदे से काफी हद तक संतुष्ट थे। चार बोडोलैंड जिलों और तीन स्वायत्त हिल काउंसिल जिलों के लोगों और संगठनों ने प्रस्ताव का स्वागत किया। हालांकि, बड़े पहाड़ी भौगोलिक क्षेत्र और कम आबादी वाली बस्तियों के कारण डिमा हसाओ, पश्चिम कार्बी आंग्लांग और कार्बी आंग्लांग जिलों में विधानसभा सीटों को और बढ़ाने की मांग की गई। बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के लोगों ने उदालगुड़ी और बक्सा जिलों के लिए एक और एसटी संसदीय सीट बनाने की भी मांग की गई।
यदि ऐसा नहीं हो सके, तो कम से कम दरंग पीसी का नाम बदलकर उदालगुड़ी करने का सुझाव दिया गया। बराक घाटी के कुछ प्रतिनिधियों ने करीमगंज के संसदीय क्षेत्र को अनारक्षित करने का स्वागत किया। हालांकि, बराक घाटी के कई प्रतिनिधियों ने मांग की कि घाटी में प्रस्तावित13 विधानसभा सीटों के स्थान पर पूर्व के 15 सीटें बहाल किया जाना चाहिए। मसौदा प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कई संगठनों ने क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और जातीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कुछ संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के नामकरण में बदलाव का अनुरोध किया। इनमें नरसिंगपुर एसी से धोलाई, गोबर्धन एसी से मानस, दरंग पीसी से दरंग-उदालगुरी, बटद्रबा एसी से ढिंग, बदरपुर एसी से करीमगंज उत्तर, उत्तर करीमगंज एसी से करीमगंज दक्षिण, दक्षिण करीमगंज एसी से पथारकांडी, राताबारी एसी से रामकृष्ण नगर, मोरान एसी से खोवांग, डिमा हसाओ एसी से हाफलोंग, हाजो एसी से हाजो-सुआलकुची, भवानीपुर एसी से भवानीपुर-सरभोग, चाबुआ एसी से चाबुआ-लाहोवाल और आलगापुर एसी से आलगापुर-कातलीचेरा जैसे नामकरण शामिल हैं।
निचले असम, मध्य असम और बराक घाटी जिलों के कुछ संगठनों ने भी निर्वाचन क्षेत्रों की सघनता, निकटता बनाए रखने और जहां तक संभव हो प्रशासनिक इकाइयों को बरकरार रखने का अनुरोध किया। इन मापदंडों के आधार पर उन्होंने कुछ गांवों/पंचायतों को एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। अधिकसंख्यक अभ्यावेदनों में एक या दो गांवों/पंचायतों को एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। सिबसागर जिले के कई लोगों ने जगह के ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व का हवाला देते हुए अपने जिले में आमगुड़ी एसी की बहाली के लिए अभ्यावेदन प्रस्तुत किया।