इंफाल : मणिपुर में 4 मई को भीड़ ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमाया था। उसी दिन दो अन्य लड़कियों का रेप कर हत्या कर दी गई थी। ये घटना कांगपोकपी जिले के कोनुंग ममांग इलाके में हुई थी, यह जगह दूसरे घटनास्थल से 40 किलोमीटर दूर है। पीड़ितों के साथ काम करने वाले एक शख्स ने बताया कि एक लड़की की उम्र 21 और दूसरी की 24 साल थी। दोनों गैराज में काम करती थीं। उस दिन भीड़ में महिलाएं भी आई थीं। उन महिलाओं ने ही भीड़ में मौजूद मर्दों से उनका रेप करने के लिए कहा था। इसके बाद वो लड़कियों को कमरे में ले गए। लाइट बंद कर दी। उनके मुंह पर कपड़ा बांध दिया गया। डेढ़ घंटे बाद उनको घसीटते हुए बाहर लाया गया। उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे। वो खून से लथपथ थीं। उनके बाल भी कटे हुए थे। दोनों लड़कियों में से एक की मां ने बताया है कि 16 मई को उन्होंने सैकुल पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज कराई थी। डरे होने के कारण पहले रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत नहीं हुई। बाद में जब माहौल थोड़ा शांत हुआ तो रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर के मुताबिक, दोनों लड़कियों का रेप हुआ, उन्हें टॉर्चर किया गया और बाद में बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना में 100-200 लोगों के मौजूद होने का जिक्र है। ये मामला फिलहाल पोरोम्पैट पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया गया है। पुलिस को अब तक पीड़ितों के शव नहीं मिले हैं।
4 मई को ही दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना थोउबाल जिले में हुई थी। इसका वीडियो 19 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कुछ लोग दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके ले गए और उनसे अश्लील हरकतें कीं। एक पीड़ित महिला के पति ने बताया कि हजार लोगों की भीड़ ने गांव पर हमला किया था। मैं भीड़ से अपनी पत्नी और गांव वालों को नहीं बचा पाया। पुलिसवालों ने भी हमें सुरक्षा नहीं दी। भीड़ तीन घंटे तक दरिंदगी करती रही। मेरी पत्नी ने किसी तरह एक गांव में पनाह ली। वहीं, वीडियो में दिख रही दूसरी महिला की मां ने कहा कि अब हम कभी अपने गांव नहीं लौटेंगे। वहां मेरे छोटे लड़के की गोली मारकर हत्या कर दी गई, मेरी बेटी को शर्मिंदा किया गया। अब मेरे लिए सब कुछ खत्म हो चुका है। मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने के मामले में अब तक पांच आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
21 जुलाई को गिरफ्तार किए गए 4 आरोपियों की कोर्ट में पेशी हुई थी। उन्हें 11 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। मणिपुर में 3 मई से 28 जून तक 5,960 एफआईआर दर्ज हुईं। इनमें से 1,771 केस जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज हुए। इनमें से एक तिहाई मामले महिला उत्पीड़न से जुड़े हुए थे। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, मणिपुर में 2019 में 2,830, 2020 में 2,349 और 2021 में 2,484 एफआईआर ही दर्ज हुई थीं। वहीं, इस साल मई-जून में ही करीब 6 हजार मामले दर्ज हो गए। राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने खुद माना है कि हिंसा के दौरान राज्य के विभिन्न थानों में हजारों एफआईआर दर्ज हुई हैं। जातीय हिंसा की वजह से लोग एफआईआर दर्ज कराने के लिए एक-दूसरे के इलाके में नहीं जा रहे। जीरो एफआईआर दिल्ली, एजल और गुवाहाटी में भी दर्ज हो रही हैं। दूसरी ओर मणिपुर पुलिस और केंद्रीय बलों ने आदिवासी महिलाओं के साथ बेअदबी के 19 जुलाई को सामने आए वीडियो के मद्देनजर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी है। पुलिस ने बताया कि सुरक्षाकर्मी कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर इस घटना के बाकी बचे आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि मणिपुर पुलिस ने राज्य के कांगपोकपी जिले में चार मई को दो जनजातीय महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना के संबंध में अभी तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने घाटी व पहाड़ी दोनों जिलों के संवेदनशील और सीमांत क्षेत्रों में छापेमारी की। इस अभियान के हिस्से के रूप में कांगपोकपी जिले के फैलेंग पहाड़ी चोटी पर नौ बंकरों और शिविरों को नष्ट किया गया। मणिपुर पुलिस ने ट्वीट में कहा कि पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 126 नाके और जांच चौकियां बनाई गई है और हिंसा के संबंध में पुलिस ने 413 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर जरूरी सामान की आवाजाही भी सुनिश्चित की गई है। पुलिस के मुताबिक कि एनएच-37 पर आवश्यक वस्तुओं के साथ 749 वाहनों की और एनएच-2 पर 174 वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित की गई। पुलिस ने बताया कि सभी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की मुक्त व सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा दस्ते तैनात किए गए हैं।