गुवाहाटी : असम विधानसभा को रविवार को अपना स्थाई भवन मिल गया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने पारंपरिक डिजाइन और आधुनिक तकनीक के संयोजन से बने नए परिसर का उद्घाटन किया। उल्लेखनीय है कि विधानसभा पहले एक पुराने चाय गोदाम से चल रही थी, जिसे 1972 में दिसपुर के असम की राजधानी बनने पर बैठकों के लिए बदल दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने रविवार को कहा कि हर गंभीर मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन राज्य विधानसभाओं और संसद में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए, क्योंकि लोगों को लोकतंत्र के इन मंदिरों से बहुत उम्मीदें हैं। बिड़ला की टिप्पणी मणिपुर हिंसा को लेकर संसद में जारी गतिरोध की पृष्ठभूमि में आई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर सहमति और असहमति भारत के लोकतंत्र की विशेषता है।
लोकसभा अध्यक्ष यहां असम विधानसभा के नए भवन का उद्घाटन करने के बाद राज्यों के पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, विधायकों, सांसदों, पूर्व विधायकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में हर गंभीर मुद्दे पर बहस, चर्चा, संवाद और बातचीत होनी चाहिए, लेकिन राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में कोई व्यवधान या गतिरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा लोग राज्य के कल्याण की उम्मीद लगाए जन प्रतिनिधियों को विधानसभाओं और लोकसभा भेजते हैं। बिड़ला ने कहा कि सदन में विधेयकों सहित हर मुद्दे पर गहन चर्चा और बहस लोगों के सर्वोत्तम हित में बेहतर परिणाम ला सकती है। लोस अध्यक्ष ने कहा कि असम विधानसभा जिनका असम के विकास और इसके गौरव को बढ़ाने में प्रमुख योगदान रहा है।
मेरा विश्वास है कि नया विधानसभा भवन असम के विकास के संकल्प को सिद्धि की ओर ले जाने बाला बनेगा, आत्मनिर्भर असम के उदय का साक्षी बनेगा। उन्होंने कहा कि असम विधानसभा के वर्तमान भवन में नए भवन में प्रवेश हमारे लिए पुरातन से नवीन की यात्रा के आरंभ का दिन है। नए भवन में उससे भी अधिक सामथ्र्य के साथ हम प्रदेश की प्रगति का पथ सुनिश्चित करेंगे। बिड़ला ने कहा कि भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का सबसे प्रमुख आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक सरकार चलाने की व्यवस्था नहीं है, यह हमारा संस्कार, हमारी परंपरा और हमारी जीवन है। अभी कुछ ही दिनों पहले आपने देखा कि किस प्रकार नए भारत कि आकांक्षाओं का साकार स्वरूप हमारी संसद का नया भवन बनकर तैयार हुआ है। पूरा देश भारतीय लोकतंत्र के एक स्वर्णिम क्षण का साक्षी बनाए जब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था यानी संसद का नया भवन देश को लोकार्पित किया।
उसी प्रकार असम विधान सभा का नया भवन भी यहाँ की संस्कृति की विविधता, यहाँ की समृद्ध विरासत को सजीव करने के साथ साथ आधुनिक सुविधाओं से युक्त भी है। उन्होंने कहा कि यह भवन की इमारतें नहीं होती, बल्कि वे पवित्र स्थान होती हैं जहां जनता के अभावों,उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाता है। यहां लोकतंत्र की भावना जीवंत होती है। इन भवनों में हम जो चर्चा संवाद करते हैं, उनका हमारे नागरिकों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलि हमारा दायित्व है कि हम विवेक, संवेदना और पूरी निष्ठा के साथ फैसले करें। बिड़ला ने विपक्ष का नाम लिए बगैर उनपर निशाना साधते हुए कहा कि आजकल देखा जाता है कि हमारे सदनों में असहमति और विरोध प्रदर्शित करने के लिए अमर्यादित एवं अशोभनीय तरीकों का नियोजित व्यवधान का इस्तेमाल किया जाता है।
जनप्रतिनिधि सदन के वेल में आकर नारेबाजी करते हैं, तख्तियों दिखाते हैं और अनुचित भाषा का प्रयोग करते हैं। हमें मंथन करना चाहिए कि हम अपने सदनों को किस दिशा में लेकर जा रहे हैं। विचार करना चाहिए कि हमें जनता ने किस उद्देश्य से चुनकर भेजा है। जनता की हमसे आशा रहती है कि हम सदन के अंदर उनकी समस्याओं, अभावों कठिनाईयों पर चर्चा करेंगेए ताकि उनका एक सार्थक समाधान निकल सके। हमारा दायित्व है कि हम अपने लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में काम करें। हमारे सदन जीवंत और चर्चा संवाद का केंद्र बनें, ताकि विधायिका के रूप में हम शासन को जवाबदेह व पारदर्शी बना सकें। अंत में उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह नया विधानसभा भवन आत्मनिर्भर असम का साक्षी बनेगा। आप जब इस नए भवन में प्रवेश करे तो इस भावना, इस सोच के साथ करे कि यहां होने वाला हर निर्णय आने वाले भविष्य को सजाने- संवारने वाला हो।