गुवाहाटी : लंबे अंतराल के बाद केंद्र सरकार शुक्रवार को दिल्ली में यूनाइटेड लिबरेशन  फ्रंट ऑफ असम (अल्फा) के वार्ता समर्थक नेताओं के साथ बैठक करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से आयोजित इस शांति वार्ता में सरकार तथा अल्फा के मध्यस्थ के साथ मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा भी शामिल होंगे। बैठक में भाग लेने के लिए अल्फा के केंद्रीय नेतृत्व का 4 सदस्यीय टीम पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी है। वार्ता समर्थक अल्फा नेताओं में अल्फा के महासचिव अनूप चेतिया, अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, विदेश सचिव शश चौधरी और वित्त सचिव राजू बरुवा शामिल हैं। केंद्र सरकार द्वारा अल्फा को शांति समझौते का मसौदा सौंपने के बाद आयोजित इस बैठक में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

अल्फा के वार्ता समर्थक पक्ष ने भारत सरकार के समक्ष 12-सूत्रीय शांति समझौते के शर्तें पूरी करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसकी 11 शर्तें मान लीं और समझौते की एक मसौदा प्रति अल्फा के केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी। लेकिन  अल्फा नेतृत्व ने मसौदे पर गहरा असंतोष व्यक्त किया था। अल्फा के वार्ता समर्थक पक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार असम के मूल निवासियों के संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की शर्तों पर सहमत नहीं हुई है। अल्फा ने असम विधानसभा क्षेत्रों का 88 प्रतिशत अर्थात 102 निर्वाचन क्षेत्र मूल निवासियों के लिए आरक्षित करने की शर्तें दी थी।

लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी यह मांग मानने से इनकार कर दिया था। इस पर अल्फा के वार्ता समर्थक पक्ष के नेतृत्व ने अपना असंतोष व्यक्त करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण ने इस बात पर संदेह पैदा कर दिया है कि केंद्र सरकार अल्फा की उक्त मांग को पूरा करने के लिए सहमत होगी। दिसपुर के अंदर और बाहर इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि क्या निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण की अंतिम सूची असम के मूल निवासियों की सुरक्षा का दावा करके धोखा देगी?