नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के लिए अपने हर हिस्से में जी20 बैठकें आयोजित करना स्वाभाविक है। यह हमारा अधिकार है। उन्होंने यह बात कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश में आयोजित कुछ कार्यक्रमों पर चीन की आपत्तियों को खारिज करते हुए कही। वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता को प्रदर्शित करने के अपने प्रयासों के तहत, मोदी सरकार ने देश भर में जी20 कार्यक्रमों की मेजबानी की है। चीन, जो जी20 का सदस्य है, और पाकिस्तान, जो समूह का सदस्य नहीं है, ने कश्मीर में भारत द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्णय पर आपत्ति जताई थी, जिसे वे  विवादित कहते हैं। चीन, अरुणाचल प्रदेश पर भी भारत की संप्रभुता पर आपत्ति व्यक्त करता है। भारत पहले ही चीन और पाकिस्तान के दावों को खारिज कर चुका है। मोदी ने पिछले सप्ताह के अंत में पीटीआई-भाषा को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा कि ऐसा प्रश्न वैध होता यदि हमने उन स्थानों पर बैठकें आयोजित करने से परहेज किया होता। हमारा देश अत्यंत विशाल, सुंदर और विविधतापूर्ण है। जब जी20 बैठकें हो रही हैं, तो क्या यह स्वाभाविक नहीं है कि बैठकें हमारे देश के हर हिस्से में आयोजित होंगी। भारत ने 22 मई से तीन दिन तक श्रीनगर में पर्यटन पर जी20 कार्य समूह की तीसरी बैठक आयोजित की थी। चीन को छोड़कर जी20 देशों के सभी प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम के लिए सुरम्य घाटी का दौरा किया था।मार्च में जी20 कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा भी किया था।

भारत ने तब चीनी दावों को खारिज करते हुए कहा था कि वह अपने क्षेत्र में बैठकें करने के लिए स्वतंत्र है। मोदी ने कहा कि जब तक भारत की जी20 अध्यक्षता का कार्यकाल समाप्त होगा, तब तक सभी 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों के 60 शहरों में 220 से अधिक बैठकें हो चुकी होंगी। उन्होंने कहा कि लगभग 125 राष्ट्रीयताओं के एक लाख से अधिक प्रतिभागी भारतीयों के कौशल को देखेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध को लेकर चिंता जताई है। पीएम मोदी ने  कहा कि लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध, सामाजिक और भू-राजनीतिक तनाव उत्पन्न कर सकते हैं। एक इंटरव्यू में साइबर अपराध से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन कट्टरपंथ के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहे हैं और डार्क नेट, मेटावर्स और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म जैसे उभरते डिजिटल तरीकों का फायदा उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि साइबर अपराधों के सामाजिक, भू-राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं और इससे निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक का अनुमान है कि साइबर हमलों से 2019-2023 के दौरान दुनिया को लगभग 5.2 ट्रिलियन अमरीकी डालर का नुकसान हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव सिर्फ वित्त तक ही सीमित नहीं है।

इसके सामाजिक और भू-राजनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन कट्टरपंथ के लिए तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। मनी लॉन्डि्रंग और ड्रग्स की कमाई को आतंकी फंडिंग के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और अपने नापाक इरादों के लिए डार्क नेट, मेटावर्स और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म जैसे उभरते डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर आतंकवाद, ऑनलाइन कट्टरपंथ, मनी लॉन्डि्रंग से लेकर ड्रग्स और आतंकवाद तक धन पहुंचाने के लिए नेटवर्क प्लेटफार्म का उपयोग किया जा रहा है।की गईं।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक वृद्धि को अपनी सरकार के नौ साल के कार्यकाल की राजनीतिक स्थिरता का ‘स्वाभाविक सह-उत्पाद’ बताते हुए उम्मीद जताई है कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र होगा, जिसमें भ्रष्टाचार, जातिवाद और सांप्रदायिकता के लिए कोई जगह नहीं होगी।  उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति पर काबू पाने की कवायद में केंद्रीय बैंकों को नीतिगत रुख के बारे में समय पर और स्पष्ट सूचना देनी चाहिए ताकि प्रत्येक देश के महंगाई रोकने की लड़ाई के कदमों का दूसरे देशों पर नकारात्मक दुष्प्रभाव न पड़े।

इस समय जहां अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक सुस्ती, गंभीर किल्लत, ऊंची मुद्रास्फीति और अपनी आबादी की बढ़ती उम्र की समस्या का सामना कर रही हैं, वहीं भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जिसके पास सबसे बड़ी युवा आबादी है। मोदी ने कहा कि विश्व इतिहास में लंबे समय तक भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। बाद में उपनिवेशवाद के प्रभाव की वजह से हमारी वैश्विक पहुंच घट गई। लेकिन अब भारत एक बार फिर आगे बढ़ रहा है। हमने जिस रफ्तार से दुनिया की 10वीं से पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था तक लंबी छलांग लगाई है वह दर्शाता है कि भारत को अपना काम बखूबी पता है। उन्होंने लोकतंत्र, जनांकिकी और विविधता के साथ विकास (चार ‘डी’) को भी जोड़ते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक का काल व्यापक अवसरों से भरपूर है और इस दौर में रहने वाले भारतीयों के पास वृद्धि की एक नींव रखने का बड़ा अवसर है, जिसे आने वाले हजारों साल तक याद रखा जाएगा।