डिब्रूगढ़ : असम मेडिकल कॉलेज  में पढ़ने वाली एक अल्पसंख्यक समुदाय की एक महिला चिकित्सक ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपना  लिया है, लेकिन उसके परिवार की तरफ से उसके ऊपर बनाए जा रहे लगातार दबाब के बाद महिला ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा से सुरक्षा की गुहार लगाई है, वहीं मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मामले की जांच कर न्यायपूर्ण कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस खबर के बाद चर्चा का बाजार गर्म है। मालूम हो कि उक्त महिला चिकित्सक ने आरोप लगाया कि उसका परिवार उस पर एक मौलवी के साथ शादी करने के लिए मजबूर कर रहा है ताकि वह मरने के बाद जन्नत (स्वर्ग) में जा सके। महिला चिकित्सक ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मेरा नाम अलीमा अख्तर है और मैं यह वीडियो एक बयान के रूप में बना रही हूं। आप मुझे एयरपोर्ट पर घूमते हुए देख सकते हैं, आप यह भी देख सकते हैं कि मेरे पीछे सुरक्षाकर्मी भी हैं। मेरे आसपास कुछ भी नहीं हो रहा है, मैं ठीक हूं , लेकिन समस्या यह है कि मेरे परिवार ने मुझे जान से मारने की धमकी दी है क्योंकि मैंने दो गलतियां की है।

सबसे पहले, मैंने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया जिसके लिए मेरे परिवार के सदस्य मुझे मारना चाहते थे और हर दिन मुझे मौत की धमकियां मिलती थीं और खुद को बचाने के लिए जो मेरा मौलिक अधिकार है, मैं अपने घर से बाहर चली आयी हूं। दूसरे, मेरे परिवार ने मेरे बारे में एक झूठा अपहरण का मामला पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया है। इस झूठे मामले को दर्ज करने का कारण यह है कि वे चाहते हैं कि पुलिस मुझे पकड़ ले और मुझे मेरे परिवार को सौंप दे ताकि वे जबरदस्ती मेरी शादी एक मौलवी से करा सकें। चिकित्सक ने जोर देते हुए कहा  है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति से उसकी जबरन शादी का कारण यह है कि उसके परिवार का मानना है कि अगर वह अपने से अधिक उम्र के किसी व्यक्ति से शादी करती है तो वह इस जीवन के बाद जन्नत (स्वर्ग) जाएगी। मैं ऐसी मान्यताओं के खिलाफ हूं और इसलिए मैं उनसे अलग हो चुकी हूं। मैं अपने परिवार के पास वापस नहीं जाना चाहती क्योंकि मैं किसी मौलवी से शादी करने को तैयार नहीं हूं।

मैं अपनी मेडिकल की पढ़ाई जारी रखना चाहता हूं। इसके अलावा मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी ने मेरा अपहरण नहीं किया है। मैं शांति महसूस कर रही हूं क्योंकि मैं अब अपने परिवार के साथ नहीं हूं। उस वीडियो को महिला चिकित्सक ने मुख्यमंत्री को ट्वीट किया है। उसके ट्विटर वीडियो पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने डीजीपी जीपी सिंह को घटना को देखने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। तदनुसार, शीर्ष पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि मुख्यमंत्री ने ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि सर ने जैसा निर्देश दिया है, असम पुलिस  उसका कानूनी रूप से पालन करेगी। दूसरी तरफ असम मेडिकल कॉलेज में महिला चिकित्सक के पढ़ाई किए जाने व उक्त मामले के संदर्भ में जब प्रहरी संवाददाता ने एएमसी के प्रिंसिपल डॉ संजीव काकोति से बातचीत की उन्होंने कहा कि वह महिला चिकित्सक छह महीने पहले एएमसीएच से पढ़ाई समाप्त कर जा चुकी है, वैसे भी यह उसका व्यक्तिगत मामला है।

दूसरी ओर डॉक्टर के भाई वकील खान ने पहले उसका पता लगाने के लिए पुलिस की मदद मांगी है। पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह को लिखे एक पोस्ट में खान ने कहा कि उनकी बड़ी बहन 17 अगस्त से तिनसुकिया के हपजान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लापता है, जहां वह तैनात थी। पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए डीजीपी सिंह ने लिखा कि उसने ऑनलाइन एक वीडियो पोस्ट किया है जो बताता है कि उसे अपने परिवार से मौत की धमकी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी कोई भी धमकी गैरकानूनी है और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। खान ने सिंह को जवाब देते हुए कहा कि उनसे नौ लाख रुपए की मांग की गई है। उन्होंने वीडियो को पूरी तरह से निराधार बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन कुछ संकट में हो सकती है। उन्होंने डीजीपी से उसका पता लगाने का अनुरोध किया। सिंह ने बाद में कहा कि मामले की जांच की जा रही है।