पोकरण : डिफेंस से जुड़े प्रोटक्ट्स में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। पिछले हफ्ते भारत आए ब्राजीलियाई सेना के कमांडर जनरल टॉमस मिगुएल माइन रिबेरो पाइवा ने 'मेड इन इंडिया' हथियारों में इंटरेस्ट दिखाया है। पोकरण के फील्ड फायरिंग रेंज में जमीनी लड़ाई और हवाई सुरक्षा के हथियारों का प्रदर्शन देखकर वे डील करने के लिए तैयार हैं। केन्या के रक्षा मंत्री अडेन ब्रे डुआले भी भारत से नेवल शिप और अटैक हेलिकॉप्टर खरीदना चाहते हैं।

एक दशक पहले हथियार खरीद के मामले में भारत आयातक देशों की सूची में टॉप पर था। 6 सालों में हमारा रक्षा निर्यात 10 गुना बड़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में भारत ने 16 हजार करोड़ रुपए के स्वदेशी हथियार और पॉट्र्स 80 देशों में बेचे हैं। डिफेंस के फील्ड में ये बदलाव की कहानी एक दिन की तैयारी का नतीजा नहीं है। सरकार ने 2025 तक 14 हजार करोड़ रुपए के डिफेंस प्रोडक्शन का   शेष पृष्ठ 11 पर  लक्ष्य तय किया है, जबकि अगले पांच साल में 35 हजार करोड़ के निर्यात की तैयारी है।

कुछ साल पहले तक भारत विश्व में रक्षा उपकरणों के टॉप तीन इंपोर्टर में से एक बन गया था। पहले रक्षा बजट का अधिकांश हिस्सा सैलरी व पेंशन पर खर्च होता था। इससे हमारी जीडीपी पर असर पड़ता था। भारत ने 70 फीसदी से ज्यादा हार्डवेयर बंद करने शुरू किए। यही हमारे लिए टर्निंग पाइंट साबित हुआ।