गुवाहाटी : राज्य में प्रति यूनिट बिजली टैरिफ की कीमत में एक रुपए प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने दिसपुर स्थित जनता भवन में बुधवार दोपहर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले साल हमें 1800 मेगावाट बिजली की जरूरत थी लेकिन इस वर्ष 2500 मेगावाट बिजली की जरूरत हो रही है। हाल के दिनों में राज्य को लगातार 2,500 मेगावाट बिजली की आवश्यकता हो रही है। पीक आवर्स के दौरान ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। पिछले साल कुछ दिनों में 2,300 मेगावाट तक बिजली की जरूरत हुई थी, लेकिन 2,500 मेगावाट तक नहीं। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि राज्य को इतनी बिजली की जरूरत क्यों हो रही है।
सीएम ने कहा कि मैंने एपीडीसीएल को सभी पहलुओं पर गौर करने का निर्देश दिया है। आम तौर पर हमें पीक आवर्स के दौरान 1,800 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है। इसके विपरीत, हम विभिन्न स्रोतों से 1,650 मेगावाट बिजली एकत्र कर सकते हैं। रोजाना करीब 700 मेगावाट बिजली की कमी हो रही है। बिजली की इस कमी को पूरा करने के लिए हमें खुले बाजार से ओपन सोर्स बिजली खरीदनी होगी। खुले बाजार से प्रति यूनिट बिजली 10 रुपए में खरीदनी होगी। पहले से समझौता होने पर हमें 5 रुपए प्रति यूनिट बिजली मिल सकती है। अगर हम खुले बाजार से बिजली खरीदें तो हमें रोजाना 6 करोड़ रुपए, एक महीने में 180 करोड़ रुपए, 4 महीने में 700 करोड़ रुपए की जरूरत होगी।
राज्य में 24 घंटे बिजली आपूर्ति जारी रखने के लिए हमें खुले बाजार से बिजली खरीदनी होगी। इससे बिजली की कीमत में 1 रुपए प्रति यूनिट की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, क्या हम खुले बाजार से बिजली खरीदें या सरकार समग्र स्थिति से निपटने के लिए एपीडीसीएल को कुछ धनराशि प्रदान करेगी, इस पर कुछ दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 8 सितंबर को राज्य कैबिनेट की बैठक होगी। बैठक में बिजली दरों में बढ़ोतरी या और क्या किया जा सकता है, इस पर विस्तार से चर्चा होगी उस दिन निर्णय को अंतिम रूप दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के पक्ष में नहीं है। अगर इन दिनों लोड शेडिंग के माध्यम से दैनिक मांग को 2,000 मेगावाट तक कम किया जा सकता है, तो शायद बिजली दरों में वृद्धि नहीं करनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 सितंबर में कैबिनेट में एपीडीसीएल द्वारा सरकार को वास्तविक तस्वीर बताने के बाद ही बिजली खरीद पर निर्णय लिया जायेगा।