संयुक्त राष्ट्र : भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर अपनी प्रतिक्रिया तय करने में 'राजनीतिक सहूलियत' को आड़े नहीं आने देने का आह्वान किया।  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान तथा अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप की कवायद चुनिंदा तरीके से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वे दिन बीत गए जब कुछ राष्ट्र एजेंडा तय करते थे और उम्मीद करते थे कि दूसरे भी उनकी बातें मान लें। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया चुनौतीपूर्ण वक्त से गुजर रही है। उन्होंने भारत की जी20 अध्यक्षता की तारीफ करते हुए कहा कि हमारी पहल से अफ्रीकन यूनियन संगठन का हिस्सा बना। ऐसा करके हमने पूरे महाद्वीप को एक आवाज दी, जो काफी समय से इसका हकदार रहा है।

बैठक में पीएम मोदी की जगह एस जयशंकर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलावों की भारत की मांग को दुनिया के सामने दोहराया है। उन्होंने कहा समय बदल रहा है, अब दूसरे देशों की बात सुननी होगी। उन्होंने कहा कि चंद देशों का एजेंडा दुनिया पर नहीं थोपा जा सकता है।  विदेश मंत्री ने कहा कि हमें टीका भेदभाव जैसी नाइंसाफी फिर नहीं होने देनी चाहिए। जलवायु कार्रवाई भी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों से मुंह फेरकर  जारी नहीं रह सकती है। खाद्य एवं ऊर्जा को जरूरतमंदों के हाथों से निकालकर धनवान लोगों तक पहुंचाने के लिए बाजार की ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि न ही हमें ऐसा करना चाहिए कि राजनीतिक सहूलियत आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर प्रतिक्रया तय करे...। 

अपनी सहूलियत के हिसाब से क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं हो सकता। जब वास्तविकता, बयानबाजी से कोसों दूर हो जाए तो हमारे भीतर इसके खिलाफ आवाज उठाने का साहस होना चाहिए। उन्होंने कनाडा का नाम लिए बिना कहा- राजनीति के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देना गलत है। हम ये मानते हैं कि संप्रभुता का सम्मान जरूरी है, पर ये सम्मान चुनिंदा नहीं होना चाहिए। उनकी टिप्पणी कनाडा के संदर्भ में प्रतीत होती है जिसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हाल में अपने देश में एक खालिस्तानी चरमपंथी नेता की हत्या में भारतीय एजेंटों की 'संभावित' संलिप्तता' का आरोप लगाया था। भारत ने उनके बयान को 'बकवास' एवं 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया था।