पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह के कार्यालय में बुधवार को अल्फा (स्वतंत्र) के चार सदस्यों ने डीजीपी जीपी सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले अल्फा कैडरों में 2010 में अल्फा के 78वें बैच में शामिल हुए कैप्टन विक्रम असम उर्फ नयन पाटमाउत, 2011 में अल्फा के 78वें बैच में शामिल हुए तिनसुकिया के दीपक हातीबरुवा उर्फ दिव्य असम, 2018 में 82 बैच में अल्फा में शामिल हुए मोंटू मोरान उर्फ लेटेस्ट असम उर्फ कुलांग मोरान और पलाश मोरान उर्फ गोपाल असम शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले अल्फा सदस्यों ने मीडिया को बताया कि वे असम को आजाद कराने का सपना लेकर अल्फा कैंप में शामिल हुए थे, लेकिन आज़ादी संभव नहीं है। संघर्ष करने के बाद भी संगठन में कोई सुधार नहीं देखा। संगठन तक पहुंचने का रास्ता तो है लेकिन वापसी का कोई रास्ता नहीं है। यदि कोई वहां से भागने की कोशिश करता है तो उसे मौत की सजा दी जाती है। उन्होंने कहा कि कई सदस्य संगठन में शामिल होने के दो या तीन दिन बाद वापस लौटने के लिए रोने लगते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वे कैंप में खुद खेती करते हैं और सुबह 6 बजे और दोपहर 1 बजे खाना खाते हैं। चारों कैडरों ने कैंप में जिस संघर्ष का सामना करना पड़ा, उसका वर्णन करते हुए कहा कि अल्फा में शामिल होना गलत था। 2011 में अल्फा के 78वें बैच में शामिल हुए तिनसुकिया के दीपक हातीबरुवा उर्फ दिव्य असम ने कहा कि 2008 में पुलिस के लिए साक्षात्कार में असफल होने के बाद वह अल्फा में शामिल हो गया था। यह उल्लेखनीय है कि कैप्टन विक्रम असम उर्फ नयन पाटमाउत तथा दीपक हातीबरुवा उर्फ दिव्य असम ने दो हथगोले, एक पिस्तौल और 25 राउंड गोला-बारूद पुलिस को सौंप दिए। असम पुलिस के महानिदेशक जीपी सिंह ने गुवाहाटी के उलुबाड़ी में असम पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा, अगर अल्फा शिविर में गए लोग वापस लौटना चाहते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
लेकिन अगर वे बंदूकों और गोला-बारूद से असम को परेशान करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने कहा कि असम अब पहले जैसा नहीं रहा, असम अब विकास की राह पर है। इस दौरान पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने एपीएससी घोटाले पर टिप्पणी करते हुए कहा, जैसा कि मैंने पहले कहा, घोटाले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। घटना की जांच के लिए एसआईटी टीम का गठन पहले ही किया जा चुका है। वे अच्छा काम कर रहे हैं। जांच प्रक्रिया में अभी भी बहुत सारी फोरेंसिक रिपोर्ट की आवश्यकता है। पुलिस अगले तीन से चार महीने के अंदर पूरी चार्जशीट दाखिल कर देगी। इसलिए जांच टीम उचित सबूत जुटाने की कोशिश कर रही है। शिकायत के अनुसार सभी आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई की जाएगी।