भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में भगवान् शिवजी की महिमा अपरम्पार है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश त्रिदेवों में भगवान शिव सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहार तथा सर्वसिद्धि के दाता माने गए हैं। भगवान शिव को अकाल मृत्यु का हर्ता भी माना गया है। भगवान शिवजी की महिमा में फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पर्व हर्ष उमंग व उल्लास के साथ मनाया जाता है। शिवपुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष की कन्या सती का विवाह भगवान शिवजी से इसी दिन हुआ था। पौराणिक मान्यता के अनुसार चतुर्दशी तिथि के दिन निशा बेला में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में अवतरित हुए थे जिसके फलस्वरूप महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 मार्च, शुक्रवार की रात्रि 9 बजकर 59 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन 9 मार्च, शनिवार की सायं 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। धनिष्ठा नक्षत्र 8 मार्च, शुक्रवार को दिन में 10 बजकर 41 मिनट से 9 मार्च, शनिवार को प्रात: 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। शिवयोग 7 मार्च, गुरुवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 4 बजकर 46 मिनट से 8 मार्च, शुक्रवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्दशी तिथि (महानिशीथकाल) में मध्यरात्रि में भगवानï शिवजी की पूजा विशेष पुण्य फलदाई होती है।
शिव आराधना का विधान : ज्योतिषविद् ने बताया कि व्रत कर्ता को चतुर्दशी तिथि के दिन व्रत उपवास रखकर भगवान शिवजी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। त्रयोदशी तिथि के दिन एक बार सात्विक भोजन करना चाहिए। तिल, बेलपत्र व खीर से हवन करने के पश्चात् किया जाएगा। भगवान शिवजी का दूध व जल से अभिषेक करके उन्हें वस्त्र, चन्दन, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि अर्पित करके धूप-दीप के साथ पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर ही पूजा करनी चाहिए। शिवभक्त अपने मस्तिष्क पर भस्म और तिलक लगाकर शिवजी की पूजा करें तो पूजा विशेष फलदायी होती है।
भगवान् शिवजी की महिमा में शिव-स्तुति, शिव-सहस्रनाम, शिव महिम्नस्तोत्र, शिवताण्डव स्तोत्र, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण आदि का पाठ करना चाहिए तथा शिवजी के प्रिय पंचाक्षर मन्त्र 'ॐ नम: शिवाय' का मानसिक जप करना चाहिए। शिवपुराण के अनुसार 'ॐ नम: शिवाय शुभं शुभं कुरु कुरु शिवाय नम: ॐ ' इस मंत्र के जप से सर्वविध कल्याण होता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवजी की पूजा-अर्चना करके रात्रि जागरण करने पर ही व्रत पूर्ण फलदायी माना गया है। व्रत के दिन अपनी दिनचर्या नियमित संयमित रखते हुए भगवान शिवजी की पूजा-अर्चना करके विशेष पुण्यलाभ उठाना चाहिए। महाशिवरात्रि से ही मासिक शिवरात्रि का व्रत प्रारंभ किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि व्रत से सुख-समृद्धि सफलता मिलती है।