वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में उठ रही आवाजों के बीच अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। एक सिख व्यक्ति ने इस कानून को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने वक्फ एक्ट और इसके संशोधन को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
याचिका में विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई गई है कि वक्फ बोर्ड को ऐसी शक्तियां दी गई हैं, जिनके तहत वह किसी भी संपत्ति को 'वक्फ संपत्ति' घोषित कर सकता है, भले ही उस पर कोई अन्य समुदाय का मालिकाना हक क्यों न हो। याचिकाकर्ता ने यह सवाल उठाया है कि जब हिंदू धर्म के ट्रस्ट या संस्थानों को इस तरह की कानूनी शक्तियां प्राप्त नहीं हैं, तो केवल वक्फ बोर्ड को यह अधिकार क्यों दिया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह कानून देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है और इससे सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया है कि वक्फ संपत्तियों की पहचान और नियंत्रण की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है।
गौरतलब है कि वक्फ एक्ट, 1995 में बनाए गए कानून को लेकर पहले भी कई बार विवाद हुए हैं, लेकिन हालिया संशोधन के बाद इसे लेकर अलग-अलग समुदायों में चिंता बढ़ी है। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
यह मामला न केवल धार्मिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी तय करेगा कि सभी धार्मिक संस्थाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए या नहीं।