बिहार में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। सभी राजनीतिक पाॢटयां अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने में जुट गईं हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को बिहार में मतदान की तिथियों का ऐलान कर दिया है। बिहार विधानसभा का मतदान दो चरणों में 6 एवं 11 नवंबर को होगा। 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी। पहले चरण के लिए 10 अक्तूबर तथा दूसरे चरण के लिए 13 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी। हालांकि चुनाव आयोग द्वारा चुनावी प्रक्रिया की घोषणा के साथ ही बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। पहले चरण के लिए नामांकन दाखिर करने की अंतिम तिथि 17 अक्तूबर तथा दूसरे चरण के लिए 20 अक्तूबर तय की गई है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के चुनाव के लिए पिछले 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई जिसके तहत 7,41,92,357 मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इस बार विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तहत लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर कई राजनीतिक पाॢटयों ने चुनाव आयोग तथा सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, ङ्क्षकतु उच्चतम न्यायालय ने प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। बिहार में 38 सीटें अनुसूचित जाति तथा 2 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई हैं। वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा के लिए मतदान तीन चरणों में किया गया था। जबकि 2015 में पांच चरणों में मतदान हुआ था। इस बार सत्ताधारी जनता दल यू ने एक चरण में चुनाव कराने की सलाह दी थी जिसका भाजपा ने भी समर्थन किया था। लेकिन विपक्षी पाॢटयों ने दो चरणों में चुनाव कराने की मांग की थी। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 125 सीटेंं मिली थी, जबकि महागठबंधन के पाले में 110 सीटें गई थी। उसके बाद बिहार में काफी राजनीतिक उथल-पुथल हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई, ङ्क्षकतु अगस्त 2022 में उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाकर राजद के नेतृत्व वाली महागठबंधन से हाथ मिला लिया। नीतीश कुमार ने भाजपा पर पार्टी तोड़ने के लिए षड्यंत्र करने का आरोप भी लगाया था, लेकिन जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने अचानक महागठबंधन का दामन छोड़कर फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। बिहार में किसी भी पार्टी की जीत हो, ङ्क्षकतु नीतीश का मुख्यमंत्री बनना तय माना जाता है। इस बार का विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के साथ-साथ भाजपा के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। भाजपा बिहार चुनाव जीत कर राष्ट्रीय स्तर पर अपना दबदबा कायम रखना चाहती है। प्रशांत किशोर की नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी के मैदान में उतरने से राजग और महागठबंधन दोनों के लिए चुनौती प्रस्तुत हो गई है। यही कारण है कि नीतीश कुमार मतदाताओं को लुभाने के लिए रेवड़ियों की झड़ी लगा चुके हैं। कुल मिलाकर बिहार विधानसभा चुनाव सभी पक्षों के लिए अग्निपरीक्षा होगी।
बिहार में चुनावी शंखनाद