डिब्रूगढ़ : बैंक से ऋण न लेकर कोई सभी समाज कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता। बैंक की तरफ से ऋ ण देने से मूलधन बनता है। टाटा, बिड़ला और अंबानी आदि बैंक से ऋण लिया है। ऋण लेना खराब नहीं है। समृद्धि व विकास के लिए ऋण लेना चाहिए। भारत के अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी माइक्रो फाइनेंस ऋ ण सर्वाधिक लोगों ने लिया है, इसमें से उत्तर प्रदेश के शत-प्रतिशत लोगों ने समय पर ऋण चुकाया। इसलिए उस राज्य में विकास भी अधिक है। ऐसा कहना है मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा का। उन्होंने उपरोक्त आशय की बातें आज डिब्रूगढ़ के चोकीडिंगही खेल मैदान में आयोजित माइक्रो फाइनेंस की एक सभा मे कही। मुख्यमंत्री डॉ शर्मा ने इस मौके पर एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि चुनावी रैली में जब वे गए थे उस समय बहुत-सी महिलाओं ने माइक्रो फाइनेंस से लिए गए ऋ ण से गरीब लोगों को रियायत देने की मांग की थी। वे अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रही थीं। उनसे बातचीत कर मालूम चला कि ऋ ण की राशि वापस न करने पर बैंक के एजेंट उनके घरों से टीवी, फ्रिज और टीन आदि लेकर चले जाते हैं, जिससे उन्हें बहुत कष्ट होता था। इसलिए रियायत देनी पड़ी। पहले इस विषय को समझ नहीं पा रहा था, लेकिन अब समझ आया कि एक कंपनी से ऋ ण लेने के बाद अन्य दो तीन कंपनियों से ऋ ण लेकर घर के लिए टीवी फ्रिज और मोटरसाइकिल आदि खरीदी गई। कोई कारोबार नहीं है तो ऋ ण की राशि कहां से वापस करेंगे। इससे भी बड़ी भूल माइक्रो फाइनेंस के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ने की। उन्हें महिलाओं को यह समझना चाहिए था कि ऋ ण की राशि कोई अनुदान नहीं है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने माइक्रो फाइनेंस के तहत चेक भी बांटे।
समृद्धि व विकास के लिए ऋण लेना चाहिए : सीएम