नई दिल्ली : दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रोन वेरिएंट के खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अमेरिका में एक ही दिन में कोरोना के रिकॉर्ड 11 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, वहीं फ्रांस में रोजाना के मामले करीब पौने तीन लाख हैं। भारत में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं, पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 1.68 लाख से अधिक केस सामने आए हैं। कुल मिलाकर दुनियाभर में कोरोना का यह वैरिएंट लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बनता जा रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि ओमिक्रोन वेरिएंट, डेल्टा की तुलना में अधिक संक्रामक है। चूंकि दुनियाभर में मौजूद वैक्सीन, कोरोना के मूल रूप के आधार पर विकसित की गई हैं, ऐसे में टीकों को ओमिक्रोन संक्रमण से बचाव में भी ज्यादा असरदार नहीं पाया जा रहा है। इस बीच अध्ययनकर्ताओं ने ओमिक्रोन वेरिएंट को नियंत्रित करने का एक कारगर तरीका ढूंढ़ निकालने का दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरीके को प्रयोग में लाकर कोरोना के इस संक्रामक रूप पर काबू पाया जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ओमिक्रोन वेरिएंट की जैविक विशेषताओं के बारे में अभी भी बहुत स्पष्ट तरीके से पता नहीं चल पाया है। यह वैक्सीन की दोनों डोज से शरीर में बनीं प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा दे सकता है, हालांकि शोध से यह पता चलता है कि लोगों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देकर ओमिक्रोन को बेअसर किया जा सकता है। ओमिक्रोन पर चिकित्सीय एंटीबॉडी की प्रभावकारिता और टीकों से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को जानने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने यह जानकारी दी है। बेल्जियम स्थित केयू ल्यूवीना विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने कोरोना संक्रमितों के सैंपल की जांच कर इस बारे में समझने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के परीक्षण के निष्कर्ष में पाया कि ज्यादातर एंटीबॉडीज डेल्टा की तुलना में ओमिक्रोन के खिलाफ 3-80 गुना तक कम प्रभावी थीं। वैज्ञानिकों ने वैक्सीन की प्रभाविकता को जानने के लिए 5 माह के अन्तराल पर दूसरी खुराक लेने वाले लोगों के भी सैंपल का अध्ययन किया। इस दौरान पाया गया कि यह तरीका भी ओमिक्रोन को बेअसर करने में ज्यादा प्रभावी नहीं माना जा सकता है। एक अन्य परीक्षण में वैज्ञानिकों ने उन लोगों के भी सैंपल लिए जिन्होंने एक महीने पहले फाइजर की बूस्टर डोज ली थी। इस परीक्षण के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे लोग ओमिक्रोन से मुकाबले के लिए ज्यादा सक्षम हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने निकाल लिया तोड़, इस तरीके से ओमिक्रोन पर पा सकते हैं नियंत्रण