पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता

गुवाहाटी : इग्लैंड के द मिड यर्कशायर अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के मुख्य कन्सलटेंट डॉ. जयंत विश्वशर्मा ने भारत में हो रही कोविड इलाज प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने भारत  सरकार के सहयोग से चल रही इलाज   प्रक्रिया को गलत तथा आत्मप्रवंचना करार दिया। इसके अलावा उन्होंने कोविड को लेकर हो रहे सरकारी प्रचार को भी गलत कहा। उन्होंने कहा कि कोविड मरीजों को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्स (आईसीएमआर) द्वारा अनुमोदित जो दवाइयां दी जा रही हैं वह सही नहीं हैं। डॉ. शर्मा ने उल्लेख किया कि भारत में जिंक, डॉक्सिसाइक्लिन और इवारमेक्टीन को मिलाकर कोविड मरीजों को दिया जा रहा है। जिंक एक खनिज पदार्थ है जिसका कोविड के इलाज में कोई भूमिका नहीं है। डॉक्सिसाइक्लिन एक प्रकार का एंटीबायोटिक है। चिकित्सकों के लिए बिना जरूरत एंटीबायोटिक देना एक अपराध है। वायरस से हुई बीमारियों में एंटीबायोटिक कोई काम नहीं करता है। इवरमेकटीन पेट की कीड़ा मारने की दवा है। कोविड मरीजों को पिछली बार मलेरिया की दवा दी गई थी, इस बार पेट की कीड़ा मारने की दवा दी जा रही है। इसके अलावा डॉ. शर्मा ने यह भी कहा कि कोविड परीक्षण के अधिकांश सही नहीं है।