नई दिल्ली : भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के टॉप साइंटिस्ट समीरन पांडा का एक बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि अगर ओमिक्रोन के बाद कोरोना का कोई नया वैरिएंट नहीं आता है, तो 11 मार्च तक ये महामारी एंडेमिक स्टेज में आ जाएगी। इसका मतलब वायरस के संक्रमण की रफ्तार काफी धीमी हो जाएगी। अमरीका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, कोई बीमारी एंडेमिक स्टेज में तब मानी जाती है जब उसकी मौजूदगी स्थाई और संक्रमण सामान्य हो जाता है। ऐसे में महामारी का असर कम लोगों या किसी खास इलाके तक सीमित हो जाता है। इसके साथ ही वायरस भी कमजोर हो चुका होता है। इसके अलावा लोग भी उस बीमारी के साथ जीना सीख जाते हैं। मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड के डॉ निरंजन पाटिल कहते हैं कि ओमिक्रोन कोरोना के पिछले वैरिएंट्स के मुकाबले माइल्ड है। ये फेफड़ों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता, जिससे निमोनिया, ऑक्सिजन की कमी हो या आईसी में भर्ती होने की जरूरत पड़े। ओमिक्रोन के 85-90 प्रतिशत मामलों में मरीज को इसके कोई लक्षण नहीं आते। टोरंटो यूनिवर्सिटी की इम्यूनोलॉजिस्ट जेनिफर गोम्मरमैन कहती हैं कि मौजूदा वैक्सीन और उनके बूस्टर डोज हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत कर रहे हैं। इससे हम कोरोना से होने वाली गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से भी बच जाते हैं। दुनिया भर की कई कंपनियां ओमिक्रोन को निशाना बनाने के लिए नई तरह की वैक्सीन भी तैयार कर रही हैं। दक्षिण अफ्रीका में हुई एक हालिया रिसर्च में पाया गया है कि ओमिक्रोन संक्रमण होने पर डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनती है। हालांकि, यह तभी मुमकिन है जब मरीज फुली वैक्सीनेटेड हो। अमरीका के टॉप साइंटिस्ट एंथनी फौसी के अनुसार, कोरोना के नए वैरिएंट से दुनिया में लगभग सारे लोग संक्रमित होंगे। अगर ऐसा होता है तो ओमिक्रोन विश्व में एक डॉमिनेंट कोरोना वैरिएंट बन जाएगा और लोगों में इसके खिलाफ नेचुरल इम्यूनिटी बन जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जो वायरस लोगों की जान लेता है, वह उन्हीं के साथ मर जाता है।
50 दिन में दम तोड़ देगा कोरोना भारतीय वैज्ञानिक का दावा