नई दिल्ली : सरकार कोयला खदानों के लिए नई टेक्नोलॉजी लागू करने की योजना बना रही है। सरकार ने इसके लिए एक रोड मैप जारी किया है जिसमें उसने बताया है कि कोल माइनिंग में नई टेक्नोलॉजी को लागू कर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देगी। इसके जरिए कोल माइनिंग एक्टिविटी को सही से ट्रैक किया जा सकेगा। माइनिंग परियोजनाओं के संचालन की क्षमता बढ़ेगी जिससे वर्तमान और भविष्य में कोल माइनिंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे कोयले के लिए दूसरे देशों पर निर्भर  कम होगी। नई टेक्नोलॉजी के लागू होने के बाद न्यू ईकोसिस्टम (स्टार्ट-अप, रिसर्च इंस्टीट्यूट) की पहुंच हो सकेगी। आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल)को एक अरब टन उत्पादन करना होगा। नई टेक्नोलॉजी में पर्यावरण संरक्षण,खदान में काम करने वालों की सुरक्षा और महिलाओं के लिए अवसर पर ध्यान दिया जाएगा। पिछले 4 दशकों में देश में एनर्जी कंजप्शन 700त्न तक बढ़ा है। जिसके कारण कोयले की मांग बढ़ी है। इस बढ़ती मांग का कारण अर्थव्यवस्था बढ़ना, जनसंख्या ब?ना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार है। कोयले के अलावा ऊर्जा स्रोत सीमित क्षमता है इसलिए अगले कुछ सालों तक हमारी निर्भरता कोयले पर ज्यादा रहेगी।