कीव : रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाए हैं कि उसने अमेरिका की मदद से जैविक हथियार तैयार किए हैं। इसे लेकर रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बैठक तक बुला ली। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि रूस यूएनएससी के मंच का इस्तेमाल अपने झूठे प्रोपेगंडा को दुनियाभर में फैलाने के लिए कर रहा है। इस पूरे विवाद के बीच अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर रूस के आरोप क्या हैं और उसने इन आरोपों को लेकर क्या सबूत पेश किए हैं? पिछले हफ्ते रविवार को रूस के विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट कर अमेरिकी और यूक्रेनी सरकार पर साथ मिलकर सैन्य-जैविक हथियार कार्यक्रम चलाने का आरोप लगाया था। मॉस्को की तरफ से दावा किया गया था कि यूक्रेन पर हमला करने वाले सैन्यबल को जंग के दौरान ही कार्यक्रम को आपात स्थिति में छिपाने के सबूत मिले हैं। रूस ने दावा किया था कि उसे अमेरिका की तरफ से यूक्रेनी शहरों- खारकीव और पोल्तावा में चलाए जा रही खुफिया लैबोरेट्री से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। यूएनएससी में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंजिया ने कहा कि हमने कीव शासन द्वारा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के समर्थन से सैन्य जैविक कार्यक्रम के संचालन का पता लगाया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे दस्तावेज हैं जिनसे सामने आता है कि यूक्रेन में 30 जैविक प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क था, जहां प्लेग, एंथ्रैक्स, हैजा, और अन्य घातक बीमारियों के रोगजनक गुणों को मजबूत करने के मकसद से बेहद खतरनाक जैविक प्रयोग किए जा रहे हैं। यूएनएससी की शुक्रवार को हुई बैठक में इस मुद्दे को एक बार फिर जोर तब मिला, जब चीन ने रूस के दावों का समर्थन किया। इसके बाद ट्विटर पर हैशटैग यूएस बायोलैब्स काफी ट्रेंड करने लगा। यहां तक कि अमेरिकी दक्षिणपंथी संगठनों और क्यूएनॉन जैसे धड़ों ने भी क्रेमलिन के आरोपों के समर्थन में ट्वीट किए और अमेरिका की बाइडन सरकार से सवाल पूछे। इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की प्रतिनिधि लिंडा ग्रीनफील्ड ने कहा कि अमरीका में रासायनिक और जैविक हथियरों के इस्तेमाल की रूसी योजना पर पर्दा डालने के लिए सुरक्षा परिषद के मंच का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। लिंडा ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर अपने हमले को सही ठहराने के लिए कोई भी बहाना ढूंढ सकते हैं।
यूक्रेन के पास जैविक हथियार? : रूस का वह दावा जिससे फैला डर