इस्लामाबाद : पाकिस्तान की सियासत में उठापटक के बीच आज शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री चुने गए हैं। नेशनल असेंबली में नए पीएम के चुनाव के दौरान इमरान खान की पार्टी पीटीआई के सभी सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया। आज इमरान खान के करीबी फवाद चौधरी ने ये भी एलान किया कि उनकी पार्टी के सभी सांसद सामूहिक इस्तीफा देंगे जिसका कई सांसदों ने विरोध किया।  शाहबाज शरीफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री   पद की शपथ ली। सीनेट के चेयरमैन ने दिलाई शपथ। शरीफ देश के 23वें प्रधानमंत्री बने। राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने बेचैनी की शिकायत की है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया गया है कि डॉक्टरों ने उनकी अच्छी तरह से जांच की है और उन्हें कुछ दिनों के लिए आराम करने की सलाह दी है। पाकिस्तान के नवनिर्वाचित पीएम शाहबाज शरीफ ने कहा, आज सर्वशक्तिमान ने पाकिस्तान और देश के 22 करोड़ लोगों को बचाया है। यह पहली बार है जब अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान सफलतापूर्वक पारित हुआ है। इस देश के लोग इस दिन का जश्न मनाएंगे। शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री होंगे। उन्हें नेशनल असेंबली में कुल 174 वोट मिले।  दूसरी ओर शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बन चुके हैं।  इस बीच, सवाल ये भी उठने लगा है कि शहबाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने से भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत और कश्मीर को लेकर शहबाज की क्या सोच है? अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिराने के बाद भी शहबाज ने भारत को लेकर बयान दिया था। कहा था कि हम भारत के साथ शांति चाहते हैं, लेकिन कश्मीर मुद्दे के हल के बिना ये संभव नहीं है। शहबाज ने भारत और कश्मीर को लेकर कई बार विवादित बयान दिया है। अप्रैल 2018 में जब पाकिस्तान में चुनाव चल रहे थे, तब शहबाज ने एक रैली में कहा था कि हमारा खून खौल रहा है। कश्मीर को हम पाकिस्तान का हिस्सा बनाकर रहेंगे। उसी साल सिंगापुर में उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि अगर अमरीका और उत्तर कोरिया परमाणु हमले की कगार से वापस लौट सकते हैं तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत और पाकिस्तान ऐसा नहीं कर सकते। फरवरी 2014 में शरीफ ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार संबंधों के बीच सबसे बड़ा रोड़ा दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां हैं। जब तक दोनों देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा नहीं होगी, तब तक आम सुरक्षा संभव नहीं है। 2015 में शरीफ ने कहा था कि भारत में कुछ कट्टरपंथी पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते नहीं चाहते हैं। तब शरीफ ने आरएसएस का नाम लिया था। शरीफ ने यह भी आरोप लगाया था कि भारत बलूचिस्तान में अलगाववादियों का समर्थन करता है।