गुवाहाटी: नगर का नेहरू स्टेडियम शंख की ध्वनि, संस्कृृत के मंत्रोचारण, वैष्णव संस्कृृति व पुलिस बैड की धून से गूंज उठा। भारत सरकार की ओर से साहस,धैर्य व पराक्रम तथा उतकृृष्ट सेवा के लिए असम पुलिस को राष्ट्रपति निशान सम्मान प्रदान किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुली जीप से सवार होकर अलंकरण परेड की तैयारी का निरीक्षण किया। राज्य की वीरांगना कमांडो के साथ ही असम पुलिस की कुल 10 पलाटन ने इस परेड  में शिरकत करते हुए अपने पराक्रम को दिखाया। राज्य के 3 सत्र के 3 सत्राधिकारो ने निशान को वैदिक मंत्रोच्चारण के जरिए को शुद्ध किया साथ ही शांति पाठ किया। साथ ही साथ ही मुख्यमंत्री डॉं. हिमंत विश्वशर्मा व डीजीपी भास्कर ज्योति महंत की उपस्थिति में राज्य पुलिस को यह सम्मान प्रदान किया। असम देश का 10वां राज्य है, जिसे इस  सम्मान से  सम्मानित किया गया। शांति और युद्ध के दौरान राष्ट्र की अनुकरणीय सेवा के लिए किसी भी सैन्य या पुलिस इकाई को दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान है। मालूम हो कि इस  निशान पर असम के नक्शे, यहां के जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 36 सितारे, एक सींग वाले गैंडे और असम पुलिस की आदर्श पंक्ति तथा प्रतीक चिन्ह अंकित है। साथ उन्होंने कहा कि अपने उतकृृष्ट सेवा, अदम्य साहस और पराक्रम  के साथ राज्य से उग्रवाद, अपराध तथा अपराधी को खत्म करने, गौ तथा मानव तस्करी पर रोक लगाकर  शांति स्थापित करने वाली असम पुलिस इस सम्मान का सही हकदार हैं। अब यहा अपराध व अपराधी नही बल्कि शांति व समृद्धि के साथ सुरक्षा की बयार बह रही है। साथ ही  पूर्वोत्तर से जल्द ही अफ्सपा हटाने की उम्मीद जताई। साथ ही कहा कि पूरे असम से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफस्पा) को हटा लिया जाएगा, क्योंकि बेहतर कानून-व्यवस्था और उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौते के कारण पहले ही राज्य से इसे आंशिक रूप से हटा दिया गया है। सुरक्षा स्थितियों में सुधार के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में अफस्पा के तहत आने वाले अशांत क्षेत्रों को धीरे-धीरे घटाना शुरू किया है। केंद्रीय गृह मंत्री असम के दो दिवसीय दौरे पर आए उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा के प्रयासों के कारण अधिकतर उग्रवादी संगठनों ने शांति समझौता किया है,वही बाकी बचे उग्रवादी संगठन भी जल्द ही शांति समझौता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि असम में उग्रवाद,उग्रवादी तथा अशांति खत्म होगा तथा पूरा राज्य उग्रवाद और हिंसा से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। मां कामाख्या, महापुरूष श्रीमंत शंकरदेव,माधवदेव, दामोदर देव  व महाबाहु  ब्रह्मपुत्र, महाविर लाचित  की पवित्र धरती अपराध व अपराधियों से मुक्त हुआ। उन्होंने कहा सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को 23 जिलों से पूरी तरह और एक जिले से आंशिक रूप से हटा दिया गया है। मुझे विश्वास है कि पूरे राज्य से इसे जल्द ही हटा दिया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए हैं, उनके पुनर्वास के लिए केंद्र और राज्य की सरकारें काम कर रही हैं। असम पुलिस का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। इसने उग्रवाद, सीमा संबंधी मुद्दों, हथियारों, मादक पदार्थ और मवेशियों की तस्करी, गैंडों का शिकार और जादू टोना जैसे सामाजिक मुद्दों से निपटने में सफलता प्राप्त की है और अब वह देश के अग्रणी पुलिस बलों में से एक के रूप में उभर रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने असम पुलिस के इतिहात के साथ ही वर्तमान पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। इसके साथ ही कहा कि यह पुरस्कार असम पुलिस तथा राज्यवासियों के लिए गौरव स्वरूप है। साथ ही कहा कि अब राज्य के पुलिस थाने 24 घंटे खुले रहते है, इसके साथ ही अब राज्य की माताए तथा बहने व जरूरतमंद लोग दिन हो या रात अपनी शिकायत लेकर नि-संकच रूप से पुलिस थाने जा सकता है।