भारतीय संस्कृति के हिंदू सनातन धर्म में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करके व्रत-उपवास रखने की धार्मिक व पौराणिक मान्यता है। ज्योतिषविद् विमल जैन  ने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान श्री नृसिंह का प्राकट्य महोत्सव मनाने की धार्मिक व पौराणिक मान्यता है। इस बार भगवान श्री नृसिंह जयंती का पर्व 14 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 14 मई, शनिवार को सायं 3 बजकर 24 मिनट पर लगेगी, जो कि 15 मई, रविवार को दिन में 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। 14 मई, शनिवार को चतुर्दशी तिथि का मान होने से व्रत-उपवास इसी दिन रखकर भगवान नृसिंह की पूजा-अर्चना की जाएगी। आज के दिन श्री नृसिंह भगवान का व्रत-उपवास रखकर पूजा-अर्चना करने से शत्रुओं पर विजय के साथ ही सुख-समृद्धि और वैभव की भी प्राप्ति होती है। ज्योतिषविद् विमल जैन  ने बताया कि प्रात:काल ब्रह्म मूहूर्त में अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होना चाहिए। तत्पश्चात् अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करने के बाद श्री नृसिंह भगवान के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। लकड़ी की नवीन चौकी पर लाल या पीला रेशमी वस्ïत्र बिछाकर श्री नृसिंह भगवान की मूर्ति को स्थापित कर उनका शृंगार करके मध्याह्न काल में पूजा-अर्चना करने का विधान है। व्रतकर्ता को चाहिए कि अपनी दिनचर्या नियमित संयमित रखते हुए भगवान श्री नृसिंहजी को ऋतुफल, नैवेद्य, विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न आदि अर्पित करके धूप-दीप के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए। श्री नृसिंह भगवान के प्रतिष्ठित मन्दिर में पूजा-अर्चना करके दान-पुण्य करना अत्यन्त फलकारी है। नृसिंहपुराण में वर्णित व्रत-कथा सुननी चाहिए, रात्रि में जागरण करके कीर्तन के साथ पूजा-अर्चना करने की विशेष महिमा है। आज के दिन ब्राह्मण को यथाशक्ति नववस्त्र, स्वर्ण, रजत, गौ एवं तिल तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना विशेष पुण्य फलदायी रहता है। 


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