डिब्रूगढ़ : पहली जुलाई को सदर थाने में एफआईआर दी थी लेकिन वह दर्ज नहीं हुई। आखिर क्यों नहीं हुई? जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक को बेटे व मेरे जान को खतरा है । इस संदर्भ में लिखित शिकायत के साथ ही धमकी की रिकॉर्डिंग भी भेजी थी और पुलिस अधीक्षक ने यह बताया भी की उन्होंने एक जुलाई को वह सुनी भी थी। यदि उसी समय पुलिस कार्यवाही करती तो बिनीत की जान नहीं जाती। यह कहते हुए फफक कर रो पड़े  कैलाश बगड़िया। जिस घर मे शादी की शहनाइयां सुनाई देनी चाहिए थी वहां रोने की आवाज लोगों का कलेजा छलनी कर रही थी। कैलाश बगड़िया ने आह भरते हुए कहा कि एक एफआईआर दर्ज करने की कीमत बिनीत की जान बनी। कैलाश बगड़िया ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा से अनुरोध किया कि बिनीत को न्याय दिलाएं और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएं। मुख्यमंत्री खुद जाएं थाने और पता लगाएं कि जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने क्यों उनकी याचिका दर्ज नहीं की और यदि यही न्याय है तो वे डिब्रूगढ़ पुलिस का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। साथ ही कहा कि ऐसी ही न्याय सभी को मिले। जिस तरह बिनीत को मिली है सभी को मिले। बिनीत बगड़िया के लिए न्याय की मांग करते हुए शहर के अत्याधिक दुकानें बंद रहीं और घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। बिनीत बगड़िया की जब शव यात्रा निकाली तो पांच सौ से अधिक महिला पुरुष व युवाओ ने हाथों में ‘जस्टिस फॉर बिनीत’ का प्ले कार्ड लेकर एसपी मुर्दाबाद की ध्वनि से पूरे शहर को गुंजायमान करते हुए पुलिस अधीक्षक के घर के समक्ष कुछ देर विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद शव यात्रा को लेकर लोग सदर थाने के समक्ष पहुचकर पुलिस मुर्दाबाद व बिनीत अमर रहे के नारे लगाये। लगभग दो घंटो तक लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसी बीच पुलिस अधीक्षक श्वेतांक मिश्रा ने लोगों को शांत करते हुए बताया कि दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और दो फरार हंै। उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पत्रकारों को पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली कि दो आरोपी बैदुल्ला खान व निशांत शर्मा ट्रेन से गुवाहाटी होते हुए फरार हो रहे हैं।  जिसके बाद डिब्रूगढ़ पुलिस ने जीआरपी, होजाई व कार्बी आंगलांग पुलिस के साथ संपर्क कर उन्हें गिरफ्तार किया। साथ ही फरार दो आरोपियों की खोज की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य जनक है। किसी ने भी यह नही सोचा था कि इस तरह की घटना घटित होगी। जिस समय खबर मिला था उस समय एक टीम गई थी लेकिन Non Cognizable सेक्शन होने के कारण याचिका दर्ज नहीं की गई थी पंर जब बड़ी घटना घटित हो गई तब एक याचिका दर्ज करते हुए कार्यवाही की गई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। संभवतः यदि धमकी भरी रिकॉर्डिंग को सुनकर व कैलाश बगड़िया तथा बिनीत बगड़िया की शिकायत को महत्व प्रदान करते हुए याचिका दर्ज कर ली होती तो शायद बिनीत जीवित होता!