सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार यह महीना भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। कहते हैं जो व्यक्ति इस दौरान भगवान भोलेनाथ की सच्चे मन से अराधना करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। भगवान शिव का प्रिय रुद्राक्ष भी इस महीने पहनना बेहद ही शुभ माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के ऊपर शिव जी की कृपा सदैव बनी रहती है जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है। जानिए रुद्राक्ष धारण करने के नियम। कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति? धार्मिक मान्यता अनुसार इसमें शिवजी का वास होता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान शिव के आंसुओं से ही इसकी उत्पत्ति हुई है। ऐसा माना जाता है कि कई वर्षों तक ध्यान करने के बाद जब भगवान शिव ने अपनी आंखें खोली तो उनकी आंखों से धरती पर कुछ आंसू की बूदें गिरीं, जिससे जगह-जगह रुद्राक्ष के पेड़ उत्पन्न हुए। रुद्र की आंखों से उत्पन्न होने के कारण ही इसे रुद्राक्ष कहा गया। सावन में ऐसे धारण करें रुद्राक्ष? रुद्राक्ष धारण करने के लिए सावन का सोमवार या शिवरात्रि बेहद खास होती है। इसे धारण करने से पहले इसे लाल कपड़े के ऊपर पूजा स्थल पर रख लें। इसके बाद उसे पंचामृत से स्नान कराएं। साथ ही गंगाजल से भी स्नान कराएं। फिर शिवमंत्र का जाप करें। रुद्राक्ष को गले या हाथ में भी धारण कर सकते हैं। रुद्राक्ष की माला लाल धागे से बनी शुभ मानी जाती है। इसके अलावा जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है उसे तामसिक भोजन और मांस मदिरा से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को सुबह शाम भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए। रुद्राक्ष को कभी भी काले रंग के धागे में धारण न करें।
माला में रुद्राक्ष की संख्या कितनी होनी चाहिए