स्वस्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर महान उद्योगपति आदरणीय जेआरडी टाटा (जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा) के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियां उजागर कर रही हूं। दिलीप कुमार ने अपनी बायोग्राफी में एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक बार में फ्लाइट में सफर कर रहा था तो मेरे पास वाली सीट में एक पढ़ें लिखे मिडिल क्लास वाले सज्जन बैठे थे। उस फ्लाइट में तकरीबन सभी लोगों ने मुझे पहचान लिया। मगर पास बैठे सज्जन ने मुझे कुछ भी नहीं पूछा। कुछ देर बाद मैंने ही उनको हेलौ कहा हमारे बीच बातों का सिलसिला शुरू हुआ। मैंने उनसे पूछा आप का नाम। उन्होंने बताया मेरा नाम जे.आर.डी टाटा है। मैं जिस फ्लाइट में सफर कर रहा था उस फ्लाइट के कर्ताधर्ता मेरे पास बैठे थे। उस दिन समझ आया कि सफल व्यक्ति की महानता उसकी विनम्रता से ही सफल होती है, सफलता पाना अलग बात है, जीवन को सार्थक बनाना ये अलग बात है। जे.आर .डी टाटा का जन्म 29 जूलाई 1904 में पेरिस में हुआ था। इनके पिता का नाम रतनभाई टाटा था। इनकी मां सुजैन बरे थी। इन्होंने केमब्रिज युनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की थी। ये एक दशक तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन के पद पर आसीन थे। और इस्पात, इंजिनियरीग, होटल, वायुयान और अन्य उधोगों का भारत में विकास किया। इनके नाम भारत को पहली एयरलाइंस देने का भी रिकॉर्ड दर्ज है,देश का पहला पायलट लाइसेंस इन्हीं को दिया गया था एयर इंडिया की पन्गचुवलिटी और होसपिटेलिटी को देखते हुए इन्हें भारत के नागरिक उड्डयन का पिता भी कहा जाने लगा। जे.आर.डी टाटा सर हमेशा यही सीख मिलती है कि हमें किसी भी कार्य को दूसरे नंबर पर नहीं बल्कि पहले नंबर पर ही देना चाहिए। हर कार्य परफेक्ट होना चाहिए। दूसरी बड़ी बात जो थी जे.आर.डी टाटा सर से सिखने को मिलती हैं कि सलाह मानिए और जीवन में बदलाव लाने से मत घबराइए। इन्फोसिस की को- फाउंडर और फाउंडर नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा की किताब द लास्टिंग लिजेसी में एक घटना का जिक्र किया गया, उन्होंने कहा कि जब वे इंजिनियरिंग कॉलेज में छह सौ विधार्थियों के बीच में वे एक मात्र लडक़ी थी, और अव्वल नंबर पर थी। उसी समय टेल्को में वैकेंसी निकली, उसमें साफ लिखा था, केवल पुरुषों के लिए ,ये देखकर वे बेहद चिढ़ गई और उन्होंने सीधे टाटा को चिट्ठी लिख डाली। टाटा साहब का संदेश आया और इंटरव्यू के बाद उनको कंपनी में रख लिया गया, इस तरह वे पहली महिला इंजीनियर बनीं। तिसरी बात -जे आर डी टाटा ने उस समय में अलग अलग कंपनी शुरू की थी। वर्ष 1990 तक आते -आते 10 हजार करोड़ का विशाल समूह बन चुका था। जे .आर.डी टाटा जिनका भारत को एक उन्नत देश बनाने में बहुत बड़ा योगदान रहा।
भारत को विकसित करने में जेआरडी टाटा का महत्वपूर्ण योगदान