गुवाहाटी/बंगाईगांवः  बोंगाइगांव जिले में अधिकारियों ने बुधवार को एक मदरसे को ढहा दिया जिसके परिसर में कथित तौर पर जिहादी गतिविधियां चल रही थीं। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप और अंसार-उल-बांग्ला टीम से संबंध होने के संदेह में पिछले सप्ताह मदरसे के एक शिक्षक को गिरफ्तार किया था। अधिकारी ने कहा कि जिले के जोगीघोपा इलाके में स्थित दो मंजिला कबायतारी मा आरिफ मदरसे को तोड़ने के लिए बुलडोजर तैनात किए गए थे। मदरसे के परिसर में बने अन्य ढांचों को भी ढहा दिया गया। यह इस सप्ताह इस तरह की कार्रवाई का दूसरा मामला है। इससे पहले सोमवार को बारपेटा जिले में एक मदरसे को ढहा दिया गया था, जिसमें कथित रूप से अंसार-उल-बांग्ला टीम के दो बांग्लादेशी सदस्य चार वर्ष से रह रहे थे। बरपेटा पुलिस ने इस मामले में मदरसे के प्रिंसिपल, एक शिक्षक और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया था।  बोंगाईगांव के पुलिस अधिकारी ने कहा कि मंगलवार रात गोलपाड़ा पुलिस को एक अभियान के दौरान कबायतारी मा आरिफ मदरसे के कैंटीन से जिहादी तत्वों से संबंधित दस्तावेज मिले थे, जिसके बाद इसे ढहाया जा रहा है। ग्वालपाड़ा पुलिस ने पिछले हफ्ते मदरसे के एक शिक्षक को गिरफ्तार किया था और उसके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई थी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने मदरसे को भवन मानदंडों के उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किया था और घोषित किया था कि यह रिहाइश के लिए उपयुक्त नहीं है। आवासीय सुविधा वाले इस शिक्षण संस्थान के छात्र मंगलवार रात अपने घरों के लिए रवाना हो गए थे। अधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन ने परिसर खाली करने में छात्रों की मदद की। ज्यादातर बच्चों के अभिभावक आए और उन्हें ले गए। उल्लेखनीय है कि  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ बुलडोजर को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। यूपी में उपद्रवियों, दंगाइयों, माफियाओं और अपराधियों के अवैध ठिकानों को बुलडोजर से गिराया जा रहा है। योगी की इस कार्रवाई की तर्ज पर अब असम सरकार ने भी काम करना शुरू कर दिया है। बीते दिनों से असम के सीएम डॉ. हिमंत बिश्वशर्मा ने अपराधियों से निपटने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया है। पुलिस थाने में आग लगाने वाले दंगाइयों के घर बुलोडजर चलवाना हो या अवैध मदरसों को गिराना। लगातार हिमंत एक्शन में हैं। इसी कड़ी में उपरोक्त उल्लेखित मदरसे को आज बुधवार को गिराया गया। बीते दो महीनों के अंदर यह तीसरा मदरसा है जिसे हिमंत सरकार ने बुलडोजर से ढहा दिया है। हाल ही में असम पुलिस ने मदरसों के इमाम और शिक्षकों को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में कुल 37 लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनके ऊपर मदरसों की आड़ में आतंकी गतिविधियां संचालित करने का आरोप लगा था। ये सभी आतंकी से जुड़े थे। ऐसी खबरें थीं कि कुछ आतंकवादी धार्मिक शिक्षकों के वेश में राज्य में घुस आए थे और चुपचाप अपनी विध्वंसक और राज्य विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे थे। इसके बाद जांच एजेंसियां और पुलिस ऐक्शन में आई थी। मदरसे को गिराने से पहले मंगलवार को 224 छात्रों को दो मंजिले मदरसे से बाहर निकाला गया। इसके अलावा सहायक कर्मचारियों और टीचर को भी बाहर किया गया, उसके बाद यहां बुलडोजर चला। 30 अगस्त को ग्वालपाड़ा जिला पुलिस ने एक तलाशी अभियान चलाया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। इस कार्रवाई के दौरान बंगाली भाषा में आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) का एक पत्र और एक लोगो मिला। इस संगठन के एक्यूआईएस से जुड़े होने का संदेह है। बोंगाईगांव जिले के पुलिस अधीक्षक स्वप्ननील डेका के अनुसार जिला प्रशासन ने 30 अगस्त को जारी अपने आदेश में कहा था कि मदरसा संरचनात्मक रूप से कमजोर और मानव निवास के लिए असुरक्षित है क्योंकि मदरसा भवनों का निर्माण एपीडब्ल्यूडी विनिर्देशों / आईएस मानदंडों के अनुसार नहीं किया गया है। एसपी डेका ने कहा था कि गोलपारा जिला पुलिस ने मदरसे में आतंकी संगठन एक्यूआईएस/एबीटी से जुड़े एक गिरफ्तार व्यक्ति के साथ तलाशी अभियान भी चलाया था। 30 अगस्त को, राज्य सरकार ने इसी तरह के आरोपों पर बरपेटा जिले के ढकलीपारा इलाके में एक और मदरसा, शेखुल हिंद महमूदुल हसन जमीउल हुडा इस्लामिक अकादमी को ध्वस्त कर दिया था। यह इस्लामी संस्थान सरकारी जमीन पर बना था। एडीसी लाचित कुमार दास ने बताया कि यह संस्था राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, जिहादी संगठनों में शामिल रही है। मदरसों की जितनी भी संपत्ति है, उनका सत्यापन किया गया। ढकलीपारा का मदरसा सरकारी जमीन पर बना पाया गया। इसे किसने बनवाया और इतनी बड़ी इमारत बनाने के लिए रकम कहां से आई, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।मुख्यमंत्री ने कहा है कि मदरसा प्रबंधन संस्था नहीं चला रहा है बल्कि एक आतंकवादी केंद्र चला रहा है। सरमा ने कहा कि तीसरा मदरसा गिराया गया है, क्योंकि ये मदरसे शिक्षा संस्था नहीं बल्कि आंतकवादियों का केंद्र थे। यहां पर कट्टरवाद और आंतकवाद पढ़ाया जा रहा था।इस महीने की शुरुआत में राज्य के मोरीगांव जिले के मोइराबारी इलाके में जमीउल हुडा मदरसा को गिराया गया था। हाल ही में, मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया ता कि छह बांग्लादेशी नागरिक जो अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) / अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (एक्यूआईएस) के सदस्य हैं, उन्होंने 2016-17 में असम में एंट्री ली थी। असम पुलिस ने उनमें से एक को गिरफ्तार किया है। अभी भी पांच फरार हैं। बेहतर निगरानी के लिए अब राज्य में आने वाले इस्लामी शिक्षकों पर कड़ी निगरानी रखी जानी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा राज्य एक पोर्टल विकसित कर रहा है, जहां उनका विवरण दर्ज किया जाएगा। सरकार ने मानक संचालन प्रक्रियाएं निर्धारित की हैं। स्थानीय लोगों को कहा गया है कि अगर उन्हें पता चलता है कि कोई धार्मिक शिक्षक (इमाम) आया है तो उन्हें इसकी सूचना देनी चाहिए। सीएम ने बताया कि असम में आने वाले इमाम का पुलिस सत्यापन होगा। फिर वह मदरसों में अपनी धार्मिक शिक्षा दे सकता है। उन्होंने कहा कि असम के मुसलमान इस प्रक्रिया में सरकार का सहयोग कर रहे हैं। असम में वर्तमान में कोई सरकारी मदरसा नहीं है क्योंकि उन्हें हाल ही में नियमित स्कूलों में बदल दिया गया है। हालांकि, व्यक्तिगत या निजी तौर पर संचालित मदरसे ही असम में चल रहे हैं। बीजेपी कार्यकर्ता योगी के काम करने की शैली के मुरीद हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि योगी ने यूपी के अपराधियों और दंगाइयों पर नकेल डाल रखी है और उनसे सख्ती से निपटा जा रहा है। योगी ने यूपी में मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी अपराधियों के घर पर बुलडोजर चलवाए थे, लेकिन तब इसका उतना जिक्र नहीं हुआ। तब आलोचना हुई थी। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने योगी पर तंज करते हुए उन्हें बुलडोजर बाबा भी कहा। लेकिन फिर यह बुलडोजर बाबा ही बीजेपी के प्रचार का केंद्र बिंदु बन गया। अब दूसरे राज्य भी इस बुलडोजर मॉडल को अपना रहे हैं।