तोक्योः भारत तथा जापान बृहस्पतिवार को सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाने पर सहमत हुए जिसमें दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच पहला लड़ाकू विमान अभ्यास भी शामिल है। इसके साथ ही दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख के बीच संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने वाली एक नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। दूसरी भारत-जापान टू प्लस टू विदेश और रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान एक नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का सम्मान सुनिश्चित करने तथा विश्व कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। बैठक के बाद एक संयुक्त बयान में, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों ने सभी देशों के वास्ते धमकी या बल प्रयोग या यथास्थिति में एकतरफा बदलाव के किसी भी प्रयास का सहारा लिए बिना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। यूक्रेन के खिलाफ रूस के जारी युद्ध की पृष्ठभूमि में, जयशंकर ने कहा कि संघर्ष एवं जलवायु घटनाओं ने वैश्विक आर्थिक स्थिति को और खराब कर दिया है जिससे ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा के संबंध में गहरी चिंता पैदा हो गई है। उन्होंने कोविड महामारी के बाद विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जयशंकर के अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी और रक्षा मंत्री यासुकाज़ु हमदा के साथ वार्ता में भाग लिया। सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि आज की चर्चा के दौरान, हमने दोनों पक्षों के बीच सैन्य-से-सैन्य सहयोग और आदान-प्रदान में प्रगति को रेखांकित किया। हमने अपने द्विपक्षीय अभ्यासों के दायरे को और बढ़ाने की अपनी इच्छा साझा की। उन्होंने कहा कि हमें यह उल्लेख कर खुशी हो रही है कि हमारी वायुसेनाएं लड़ाकू विमानों के पहले अभ्यास के जल्द आयोजन के लिए मिलकर काम कर रही हैं। बैठक के दौरान, जापानी पक्ष ने जवाबी आक्रमण क्षमताओं सहित राष्ट्रीय रक्षा के लिए आवश्यक सभी विकल्पों को परखने के अपने संकल्प से अवगत कराया।
भारत-जापान सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाने पर सहमत