नई दिल्ली : मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को चीन से जुड़ी 33 शेल कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच में एसएफआईओ ने पिछले हफ्ते तीन शेल कंपनियों पर छापेमारी के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया है। इस बात की जानकारी मिनिस्ट्री ने रविवार को दी। मिनिस्ट्री ने स्टेटमेंट में कहा कि 8 सितंबर को गुरुग्राम, बेंगलुरु और हैदराबाद में स्थित तीन कंपनियों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया है। मिनिस्ट्री ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार व्यक्ति भारत में चाइनीज लिंक के साथ बड़ी संख्या में शेल कंपनियों को शामिल करने और उनके बोर्ड में नकली डायरेक्टर्स प्रोवाइड करने के रैकेट का मास्टरमाइंड है। मिनिस्ट्री ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के पास दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार खुद को हिमाचल प्रदेश के मंडी का निवासी बताया था। मंत्रालय ने अपने बयान में आरोप लगाया कि आरओसी दिल्ली को इंमरी में मिले सबूत और छापेमारी से सीधे तौर पर यह पता चला है कि गुरुग्राम बेस्ड जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने डमी डायरेक्टर्स को पैसे दिए थे। यह गुरुग्राम बेस्ड कंपनी हॉन्ग कॉन्ग बेस्ड एनटीटी जिलियन कंपनी की सब्सिडियरी है। बैंगलोर की फिनिनटी प्राइवेट लिमिटेड और हैदराबाद की हुसिस कंसल्टिंग लिमिटेड पर भी छापेमारी की। मिनिस्ट्री ने आरोप लगाया कि कंपनी की मुहरों से भरे बक्से और डमी डायरेक्टर्स के डिजिटल सिग्नेचर्स साइट से बरामद किए गए हैं। भारतीय कर्मचारी एक चीनी इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए चीनी समकक्षों के संपर्क में थे। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि देश की फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए शेल कंपनियां खतरा बन सकती हैं। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने एसएफआईओ को 9 सितंबर को गुरुग्राम बेस्ड कंपनी और 32 अन्य कंपनियों की जांच का जिम्मा सौंपा था। मंत्रालय ने कहा कि एक व्यक्ति को शनिवार को गिरफ्तार किया गया और उसे न्यायिक अदालत में पेश किया गया। उसकी ट्रांजिट रिमांड के आदेश प्राप्त कर लिए गए हैं।