गुवाहाटी : राज्य के 26,000 नौकरियों के नाम पर दलालों की ओर से पैसे इकट्ठे करने पर विक्टर दास द्वारा लगाए गए आरोप सच साबित होते दिख रहे हैं। इस बार दिसपुर पुलिस ने जल संसाधन विभाग की नौकरी के नाम पर धन संग्रह करने वाले एक दलाल गिरोह को गिरफ्तार किया। रविवार को पुलिस ने गुवाहाटी महानगर के बरबारी इलाके में जीडी गेस्ट हाउस नामक एक लॉज पर छापा मारा और पिछले दो दिनों से लॉज के 102, 104 तथा 108 नंबर कमरे में रहकर नौकरी की दलाली कर रहे 7 दलालों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार दलालों की पहचान काहिलीपारा, गुवाहाटी के नयन सैकिया, मंगलदै के सिराजुल हक, नलबाड़ी के गोविंद चौधरी, नलबाड़ी के नूर इस्लाम चौधरी, ग्वालपाड़ा के जयंत दास, नलबाड़ी के प्रांजल बर्मन और गुवाहाटी महानगर के बशिष्ठ के जयंत दास के रूप में हुई है। हालांकि, नौकरी की दलाली के चक्र का मास्टरमाइंड रफीकुल इस्लाम समेत दो अन्य दलाल पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए। पुलिस ने दलालों के कमरों से जल संसाधन विभाग की मुहरों वाले करीब 10 फर्जी नियुक्ति पत्र भी जब्त किए। शिकायत मिली है कि जल संसाधन विभाग के मास्टररोल से संदर्भित एक मामले की आड़ में दलालों ने कई उम्मीदवारों से धन इकट्ठा किया था। गौहाटी हाइकोर्ट में 2017 में मास्टर रोल वर्कर्स ने नौकरी नियमित करने के नाम पर केस दर्ज कराया था। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के कुछ दिनों के भीतर मामले में अपना अंतिम फैसला देने की उम्मीद है। दलालों ने दावा किया था कि कोर्ट का फैसला वादी के पक्ष में आएगा। दलालों के गिरोह ने मास्टर रोल वर्कर्स की सूची में अन्य लोगों के नाम शामिल करने के बहाने विभिन्न लोगों से पैसे वसूलने लगा था। पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड था भगोड़ा रफीकुल हुसैन, जो लॉज 14 अगस्त से ही लॉज में रह रहा था। उसके बाकी साथी 9-10 सितंबर से ही लॉज में रहने लगे थे। लॉज के अधिकारी पुलिस से जानकारी दे चुके हैं कि रफीकुल से मिलने के लिए कई लोग अलग-अलग गुटों में आए थे। इसके अलावा डीटीपी कार्य के लिए प्रतिदिन 10,000 रुपए देने का लालच देकर वशिष्ठ के भार्गव कम्युनिकेशंस नामक डीटीपी सेंटर के मालिक जयंत दास को भी बुलाया था। जयंत ने लॉज के अंदर ही कंप्यूटर में सरकारी मुहरों को स्कैन कर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किया था। डीसीपी सुधारक सिंह ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि रविवार को छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से कंप्यूटर, फर्जी नियुक्ति पत्र और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। पुलिस ने बताया कि गेस्ट हाउस में रहकर आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र बना रहे थे। उन्होंने कई लोगों से रंगदारी वसूलने का खाका भी तैयार किया। हालांकि डीसीपी सुधारक सिंह ने दावा किया कि इन आरोपियों का 26,000 की भर्ती परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करते समय आरोपियों ने कई सरकारी मुहरों का इस्तेमाल किया था। रविवार को गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। गिरफ्तार लोगों को 7 दिनों के रिमांड पर लिया जा रहा है।
सरकारी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश : दलाल गिरफ्तार