जयपुर : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कहा कि हिंदी भाषा देश के विभिन्न राज्यों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करती है और हमारे विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। गहलोत बुधवार को सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय हिंदी दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी ने देशवासियों में भाईचारे की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हिन्दी हमारी राष्ट्रीय अखंडता की अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि लोगों को आपस में जोडऩे में भाषा का अहम योगदान रहता है। हिंदी भाषा को प्रोत्साहन देने में सरकार ने कोई कमी नहीं रखी है।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि हिन्दी हमारी सांस्कृतिक धरोहर की संवाहक है तथा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि हिंदी भाषा दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। उन्होंने हिंदी के साथ साथ अन्य अन्य भाषाओं के ज्ञान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाएं सीखने से हमारे व्यक्तित्व का विकास होता है। इस अवसर पर डॉ. गुंजन गर्ग एवं डॉ. गोपाल काबरा को चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन के लिए हिंदी सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया तथा ‘भाषा विमर्श’ के स्वर्ण जयंती विशेषांक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने हिंदी विषय में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले 393 छात्रों को भी सम्मानित किया। अपनी सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा जैसी शानदार योजना संचालित की जा रही है, जिसमें 10 लाख रूपए तक का इलाज नि:शुल्क दिया जा रहा है। जल्द ही राज्य की 1.33 करोड़ महिलाओं का तीन साल तक की इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ नि:शुल्क स्मार्टफोन वितरित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ लोगों को विभिन्न प्रकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। गहलोत ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान जैसी लोक कल्याणकारी योजनाएं पूरे देश में लागू की जाएं।
हिंदी भाषा का राष्ट्रीय अखंडता में अहम योगदान : गहलोत