दीपावली पवित्रता और सात्विकता का त्योहार है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन कर सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस त्योहार की सात्विकता को बढ़ाने के लिए झांसी नगर निगम अनूठा प्रयास कर रहा है। नगर निगम के द्वारा हंसारी स्थित कान्हा उपवन में गाय के गोबर से गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, दीया, स्वास्तिक और ओम के चिह्न, लक्ष्मी चरण पादुकाएं बनाई जा रही हैं। इन सभी वस्तुओं को कान्हा उपवन में काम करने वाले कर्मचारियों के द्वारा बनाया जा रहा है। इन सभी वस्तुओं को बेचने के लिए नगर निगम कार्यालय में एक काउंटर लगाया गया है।

गोबर का हो सकेगा सही निस्तारण- कान्हा उपवन में ऐसी गायों को रखा जाता है जिन्हें लोग सडक़ों पर छोड़ देते हैं। इस प्रथा को झांसी समेत पूरे बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा कहा जाता है। इन सभी गायों को कान्हा उपवन में लाया जाता है, जहां इनके भोजन और इलाज की भी व्यवस्था की जाती है। कान्हा उपवन में सबसे बड़ी समस्या इन गायों के गोबर के निस्तारण की होती थी। इसको देखते हुए नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा यह फैसला लिया गया है कि गाय के गोबर से ऐसे उत्पाद बनाए जाएं।

परंपरा के साथ पर्यावरण का संरक्षण- नगर पशु कल्याण अधिकारी डॉ. राघवेंद्र ने बताया कि गाय हमारी लोक परंपरा और लोक संस्कृति का अभिन्न अंग है। पुराणों और वेदों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय के गोबर का इस्तेमाल पूजा में अक्सर किया जाता है। इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए ही नगर निगम ने यह फैसला लिया है कि गाय के गोबर से बने उत्पाद बनाए जाएं। इन वस्तुओं से परंपरा के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी होगा। इसके साथ ही आम लोगों तक भी यह संदेश जाएगा कि वह गाय को सडक़ पर न छोड़ें।